‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता; हमें साजिश के तहत हराया गया’: ममता बनर्जी
बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की हार पर चर्चा करते हुए पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने मंगलवार (5 मई, 2026) को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "अगर वे सोचते हैं कि वे बल प्रयोग करके जीत जाएंगे और मैं जाकर अपना इस्तीफा दे दूंगी, तो ऐसा नहीं होगा. हम चुनाव नहीं हारे हैं. यह हमें हराने का उनका बलपूर्वक प्रयास है.
बंगाल की 96 सीटों पर नज़र: इनमें से 48 में मतदान गिरा और एसआईआर के तहत 28% नाम हटाए गए
पश्चिम बंगाल चुनाव दो प्रमुख कारणों से चर्चा में रहे: पहला, 'तार्किक विसंगतियों' का एक नया मानदंड जिसके तहत मतदाता सूची से 27.16 लाख नाम हटा दिए गए, और दूसरा, 92.95% का रिकॉर्ड मतदान, जिसमें 2021 की तुलना में 31 लाख अधिक वोट पड़े.
बंगाल में सत्ता की जंग या सक्सेशन बैटल? अमित शाह क्यों केंद्र में
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर एक अहम चर्चा हुई, जिसमें फोकस सीधे तौर पर अमित शाह की भूमिका और दांव पर रहा. बातचीत की शुरुआत इस से होती है कि जब देश के कई राज्यों में चुनाव हुए हैं, तो पूरा राष्ट्रीय ध्यान सिर्फ बंगाल पर ही क्यों केंद्रित है और केरल, तमिलनाडु या असम जैसे राज्यों को उसी तरह क्यों नहीं देखा जा रहा.
ईडी ने कोई आपत्ति नहीं की, दिल्ली की अदालत ने आई-पैक निदेशक विनेश चंदेल को जमानत दी
दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को राजनीतिक परामर्शदाता संस्था 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (आई-पैक) के निदेशक विनेश चंदेल को नियमित जमानत दे दी. यह फैसला तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी जमानत याचिका का विरोध नहीं किया. चंदेल को केंद्रीय एजेंसी ने 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया था, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ दिन पहले की बात है. राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के निदेशक और सह-संस्थापक चंदेल, चुनावी राज्य में एक कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं.
बंगाल के चुनावी रण में केंद्रीय बलों की ज्यादती के आरोप और राजनीतिक तनाव
खबरों के मुताबिक, केंद्रीय बल लोगों को पीट रहे थे और महिलाओं व बच्चों तक को नहीं छोड़ रहे थे. ममता बनर्जी ने कहा कि लाठीचार्ज की कई घटनाएं हुईं और अदालत के आदेशों का उल्लंघन करते हुए तृणमूल कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि बूथों पर प्रभावी रूप से केंद्रीय बलों ने "कब्जा" कर लिया था और सवाल उठाया कि क्या ऐसा करना उनकी ड्यूटी है.
‘मेड इन इंडिया’ संकट: बंगाल चुनाव में ‘एसआईआर’ ने महानगरों में बढ़ाई घरेलू सहायकों की किल्लत
पश्चिम बंगाल में आज मंगलवार (29 अप्रैल 2026) को दूसरे चरण की 142 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले गए. इसके पहले 23 अप्रैल को पहले दौर में 152 सीटों के लिए मतदान हुआ था. लेकिन, इस बार राज्य के चुनाव के दौरान एक सवाल पैदा हुआ कि क्या यह हाल के समय में शहरी भारतीय घरों पर आया सबसे बड़ा संकट है? या यह केवल उन परेशान घर-मालिकों को ऐसा महसूस हो रहा है, जिन्हें अब समझ आ रहा है कि वे सहायकों की उस विशाल फौज पर कितने निर्भर हैं जो उनके घरों और शहरों की रफ्तार बनाए रखते हैं, और जो अचानक गायब हो गए हैं?
‘लाखों मतदाताओं का छूटना हमारे लोकतंत्र पर कलंक है’: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओम प्रकाश रावत ने चुनाव आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी और चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. ‘द वायर’ के एमके वेणु को दिए इंटरव्यू में रावत ने कहा कि जिस बड़े पैमाने पर लाखों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब पाए जा रहे हैं, वह "हमारे लोकतंत्र पर एक बड़ा कलंक" है. उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और वह वोट दे सके. यदि लाखों लोग मतदान के अधिकार से वंचित रह जाते हैं, तो यह चुनाव की शुचिता पर सवाल खड़ा करता है.
ममता का गढ़ बनाम भाजपा का बड़ा दांव: क्या ‘एसआईआर’ पलटेगा संतुलन?
‘पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन’ द्वारा जमीनी स्थिति के सूक्ष्म अध्ययन से पता चलता है कि राजनीतिक माहौल मौजूदा सत्ताधारी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में है.“साउथ फर्स्ट” में जी मुरली कृष्णा के अनुसार, प्रतियोगिता की रूपरेखा ही एक ‘असंतुलन’ को प्रकट करती है. जहाँ टीएमसी सभी 294 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी केवल 200 के आसपास सीटों पर चुनाव लड़ रही है. प्रभावी रूप से, यदि टीएमसी पूरे 100 अंकों की परीक्षा दे रही है, तो भाजपा केवल लगभग 65 अंकों की परीक्षा दे रही है.
जब मतदाता ही गुम हो जाए: बंगाल चुनाव में लोकतंत्र का अनकहा संकट
आज टॉकिंग न्यूज़ विद निधीश के लाइव शो में पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर गंभीर मुद्दों पर चर्चा की गई. शो में वरिष्ठ पत्रकार राजेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए. बातचीत में सामने आया कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ा सवाल खुद मतदाता को लेकर खड़ा हो गया है. बताया गया कि करीब 90–91 लाख यानी लगभग हर दसवां मतदाता वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मतदान से बाहर हो सकते हैं.
अरुण कुमार: ऐन चुनाव के वक़्त बंगाल में आरएसएस का हरकत में आना
आरएसएस नेतृत्व महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को संभालने के तरीके को लेकर मोदी और शाह से नाराज़ है. उन्होंने यह उम्मीद नहीं की थी कि एक सावधानीपूर्वक नियोजित रणनीति को इस जोड़ी द्वारा बिगाड़ दिया जाएगा. बंगाल में मोदी द्वारा लगभग पूरे भाजपा नेतृत्व और मंत्री सहयोगियों की तैनाती का उल्टा असर हुआ है, क्योंकि कई बंगाली उनके प्रचार के अंदाज़ को बंगाली संस्कृति और सामाजिक मानदंडों को नज़रअंदाज़ करने वाला मान रहे हैं. परिसीमन विधेयक का उपयोग उस तरह से नहीं किया गया जैसा कि आरएसएस ने मूल रूप से सोचा था.
मोदी बनाम ममता: पूरा दिल्ली दरबार उतर आया है एक राज्य के चुनाव को जीतने?
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और केंद्र के बीच लगभग बहुत सारे मुद्दों और मोर्चों पर टकराव चल रहा है. इनमें प्रमुख रूप से चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तरों पर ईडी (ED) के छापे और उसके सह-संस्थापक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी शामिल है. ममता बनर्जी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियां उनके 800 से ज्यादा बूथ एजेंटों को गिरफ्तार करने की योजना बना रही हैं.

