भ्रष्टाचार की तरह वंशवाद का भी पाखंड; बिहार मंत्रिमंडल में निशांत सहित तीन ‘लाल’ शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार वंशवादी राजनीति (परिवारवाद) की भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़े खतरे के रूप में आलोचना की है, और इसे राजनीतिक भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का स्रोत बताया है. वे योग्यता-आधारित राजनीति की वकालत करते हैं और अक्सर युवाओं से राजनीति में शामिल होने का आग्रह करते हैं, ताकि वंशवादी प्रभाव को "कम" किया जा सके. खासकर, कांग्रेस और डीएमके जैसे विपक्षी दलों पर तो वे चाहे जब परिवार-केंद्रित होने का निशाना साधते रहते हैं. लेकिन व्यावहारिक धरातल पर मोदी की चाल-चरित्र-चेहरा की बातें करने वाली पार्टी और उनके ‘एनडीए’ गठबंधन की एकदम उलट तस्वीर दिखाई पड़ती है. बल्कि कहना होगा कि मोदी और भाजपा का जैसा दोहरा रवैया भ्रष्टाचार को लेकर है, वही परिवारवाद के मामले में है. यानी, जब तक आप विपक्ष में हैं, तो आपके खिलाफ हजारों करोड़ के घोटालों के आरोप हैं, आप भ्रष्ट हैं- लेकिन जैसे ही आप भाजपा की शरण में आए, आपसे ज्यादा कोई पवित्र नहीं!
भाजपा और एनडीए के पाखंड की एक और तस्वीर कल गुरुवार (7 मई 2026) को बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान पर दिखाई दी, जब सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया. ‘द टेलीग्राफ’ में जेपी यादव की रिपोर्ट के अनुसार, परिवारवाद की राजनीति की कड़ी आलोचना करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र निशांत कुमार सम्राट चौधरी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में शामिल हो गए. इसके साथ ही बिहार की राजनीति में वंशवाद की वह लंबी परंपरा जारी रही, जिसका उनके पिता ने हमेशा कड़ा विरोध किया था.
50 वर्षीय निशांत ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा है और वे पिछले महीने ही औपचारिक रूप से अपने पिता की पार्टी, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में शामिल हुए थे. पार्टी में किसी संगठनात्मक पद पर न होने के बावजूद, उन्हें लगातार नीतीश कुमार के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया जा रहा है.
वर्तमान में राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार उस समय मंच पर मौजूद थे, जब निशांत ने अपने पिता के पैर छूकर और उनका आशीर्वाद लेकर पद की शपथ ली. आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जबकि उन्होंने भी कभी चुनाव नहीं लड़ा है. उन्होंने पिछली नीतीश सरकार में भी काम किया था. इनके अलावा, नीतीश मिश्रा (भाजपा) और संतोष मांझी (हम) — जो क्रमशः पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय जगन्नाथ मिश्रा और ‘हम’ प्रमुख जीतन राम मांझी के पुत्र हैं — ने भी मंत्री पद की शपथ ली. और तो और खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी उसी वंशवादी राजनीति से आते हैं, जिसकी मोदी और नीतीश ने सदैव आलोचना की है और देश के लोकतंत्र के लिए घातक बताया है.
बहरहाल, बिहार में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव से शुरू हुआ यह सिलसिला, अब इन नए 'वंशजों' के उदय के साथ बिहार की परिवार-आधारित पार्टियों की गहरी परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ता है. दिवंगत दलित नेता राम विलास पासवान के पुत्र और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान राज्य के एक और प्रमुख राजनीतिक उत्तराधिकारी हैं. चिराग अपनी पार्टी के दो मंत्रियों को शपथ लेते देखने के लिए मंच पर मौजूद थे.
दिलचस्प यह है कि ‘परिवारवाद के इस राजतिलक’ के प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गठबंधन के कई अन्य वरिष्ठ नेता साक्षी बने. नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में भ्रष्टाचार की तरह ही वंशवादी राजनीति का भी कड़ा विरोध किया है. उन्होंने लालू प्रसाद द्वारा अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाने और बाद में अपने बेटों के राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने की हमेशा आलोचना की है.

