ब्राजील पुलिस ने तस्करी की जांच में पक्षी विशेषज्ञ के उपकरण जब्त किए; ‘वंतारा’ से जुड़ा मामला
ब्राजील की संघीय पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए अपनी जांच तेज कर दी है. इस मामले में 1 मई को साओ पाउलो के ग्वारूलहोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक अमेरिकी नागरिक को हिरासत में लेकर उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए. यह कार्रवाई ब्राजील की दुर्लभ प्रजातियों, विशेष रूप से 'गोल्डन लायन टैमरिन' की तस्करी की जांच का हिस्सा है.
यद्यपि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर नाम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों ने संदिग्ध की पहचान टोनी सिल्वा के रूप में की है. सिल्वा एक प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ हैं, लेकिन उनका अतीत विवादों से भरा रहा है. वेब पोर्टल ‘मोंगाबे’ में फर्नांडा वेनज़ेल अपनी लंबी रिपोर्ट में बताती हैं कि इस जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू 'वंतारा' चिड़ियाघर से इसका संभावित संबंध है. वंतारा, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनंत अंबानी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. दावा है कि सिल्वा वंतारा के लिए अवैध रूप से लुप्तप्राय जानवरों, जैसे 'ब्लैक बियर्ड साकी मंकी', की खरीद का समन्वय कर रहे थे.
रिपोर्ट के अनुसार, 1996 में अमेरिकी एजेंसी 'मत्स्य और वन्यजीव सेवा' के 'ऑपरेशन रेनेगेड' के तहत उन्हें तस्करी का दोषी पाया गया था. 1985 से 1994 के बीच 185 से अधिक 'हाइसिंथ मकाऊ' और अन्य दुर्लभ पक्षियों की अवैध आवाजाही की बात स्वीकार की थी, जिसके लिए सिल्वा को सात साल की जेल और भारी जुर्माना भुगतना पड़ा था.
हाल ही में, सिल्वा ब्राजील में पक्षी पालकों के सम्मेलन 'एविकॉन' में भाग लेने आए थे. गिरफ्तारी से पहले उन्हें उन इलाकों में देखा गया था जहाँ लुप्तप्राय 'लियर्स मकाऊ' पाए जाते हैं.
सबसे महत्वपूर्ण इस जांच का भारत के गुजरात में स्थित 'वंतारा' चिड़ियाघर से जुड़ना है. वंतारा, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनंत अंबानी का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है.
दावा है कि 2025 की एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सिल्वा को वंतारा में "संरक्षण प्रमुख" के रूप में पेश किया गया था. सोशल मीडिया पोस्ट्स भी सिल्वा और वंतारा के बीच घनिष्ठ संबंधों की पुष्टि करती हैं.
इन आरोपों के जवाब में वंतारा के प्रवक्ता ने एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है. संगठन का कहना है: सिल्वा वंतारा के कर्मचारी नहीं हैं. उन्हें केवल एक स्वतंत्र ठेकेदार के माध्यम से सीमित परामर्श (बाड़े के निर्माण और पोषण) के लिए नियुक्त किया गया था. सिल्वा की ब्राजील यात्रा उनके निजी मामले थे और वंतारा को इसकी कोई जानकारी नहीं थी. वंतारा ने स्पष्ट किया कि उन पर लगे अवैध खरीद के आरोप निराधार हैं और भारतीय अधिकारी पहले ही उनके अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को क्लीन चिट दे चुके हैं.
वंतारा अपनी भव्यता के कारण दुनिया भर में चर्चा में रहा है, लेकिन यहाँ लाए गए जानवरों की उत्पत्ति पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. सितंबर 2025 में, CITES सचिवालय ने डेटा विसंगतियों के कारण भारत को वंतारा के लिए और आयात परमिट जारी न करने की सिफारिश की थी. हालांकि, बाद में ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों के समर्थन से इस रोक को हटा लिया गया. जर्मनी की एक संस्था एसीटीपी द्वारा 23 'ब्लू स्पिक्स मकाऊ' को ब्राजील की अनुमति के बिना वंतारा भेजने का मामला भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है.
ब्राजील पुलिस का मानना है कि जब्त किए गए फोन और कंप्यूटर से एक "अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क" का खुलासा हो सकता है. यह मामला न केवल वन्यजीवों के संरक्षण पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय संरक्षण नियमों (सीआईटीईएस) की आड़ में दुर्लभ जीवों का व्यापार संभव हो पा रहा है.
वंतारा ने खुद को एक "बचाव और पुनर्वास केंद्र" के रूप में स्थापित किया है, लेकिन टोनी सिल्वा जैसे विवादित विशेषज्ञों के साथ उनकी संलिप्तता ने उनके संरक्षण दावों पर संदेह के बादल गहरे कर दिए हैं. वर्तमान में, ब्राजील की फोरेंसिक टीम डेटा विश्लेषण में जुटी है, जिससे भविष्य में बड़े खुलासे होने की संभावना है. कुलमिलाकर, यह रिपोर्ट सवाल पैदा करती है कि क्या वन्यजीवों का आदान-प्रदान संरक्षण के नाम पर हो रहा है या यह तस्करी का एक नया रूप है?

