कीर स्टार्मर ने अपने पद से क्यों दिया इस्तीफा
साल 2024 के चुनाव में लेबर पार्टी ने 412 सीटें जीतकर 14 साल बाद ऐतिहासिक वापसी की थी, जिसकी तुलना 1997 में टोनी ब्लेयर की प्रचंड जीत से की जा रही थी. हालांकि, "बदलाव" और एक "निष्पक्ष, स्वस्थ और सुरक्षित ब्रिटेन" के वादे के साथ सत्ता में आए कीर स्टार्मर अपने चुनावी वादों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे और आखिरकार उन्हें पद छोड़ना पड़ा.
अमन के पांडे के अनुसार, स्टार्मर सरकार की मुश्किलें उनके कार्यकाल के पहले 100 दिनों (हनीमून पीरियड) में ही शुरू हो गई थीं. उन पर और उनके कैबिनेट मंत्रियों पर हजारों पाउंड के महंगे उपहार, फुटबॉल मैच और संगीत कार्यक्रमों के मुफ्त टिकट लेने के आरोप लगे. इस "फ्रीबीज गेट" विवाद के कारण जनता में भारी आक्रोश फैल गया. हालांकि स्टार्मर ने बाद में इन टिकटों की कीमत चुकाई और सख्त नियम बनाए, लेकिन उनकी छवि को भारी नुकसान पहुँचा.नतीजतन, जून 2026 तक 73% मतदाताओं ने उन्हें एक खराब प्रधानमंत्री मानना शुरू कर दिया था.
अलोकप्रिय नीतियां और बजटीय कटौतियां
स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने के नाम पर स्टार्मर सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए जिससे आम जनता और खुद उनकी पार्टी के सदस्य नाराज हो गए: लगभग 1 करोड़ पेंशनभोगियों को मिलने वाली विंटर फ्यूल (सर्दियों के ईंधन) सब्सिडी में कटौती की गई, जेलों का बोझ कम करने के लिए सजा पूरी होने से पहले ही 1,700 कैदियों को समय से पहले रिहा कर दिया गया, अगले वित्तीय वर्ष के लिए बजट में लगभग 8 अरब डॉलर की भारी खर्च कटौती का प्रस्ताव रखा गया, चीफ ऑफ स्टाफ 'सू ग्रे' को दिए गए अत्यधिक भुगतान पर भारी विवाद हुआ, कंज़र्वेटिव काल की अलोकप्रिय "टू-चाइल्ड बेनिफिट कैप" (दो बच्चों के लाभ की सीमा) नीति को लंबे समय तक जारी रखा, जिसका लेबर सांसद ही विरोध कर रहे थे (इसे अंततः अप्रैल 2026 में हटाया गया).
ब्रेक्सिट की जटिलता और आर्थिक मंदी
स्टार्मर का इस्तीफा ब्रेक्सिट के ठीक 10 साल पूरे होने से एक दिन पहले आया है. एक दशक बाद ब्रिटेन की जनता में ब्रेक्सिट को लेकर भारी निराशा है, क्योंकि देश आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहा है. ब्रिटेन की जीडीपी में 2 से 8% की गिरावट आई है, महंगाई चरम पर है, व्यापारिक जटिलताएं बढ़ी हैं और गैर-ईयू अप्रवासन (इमिग्रेशन) को रोकने में सरकार विफल रही है. वर्तमान में 57% ब्रिटिश नागरिक ब्रेक्सिट को एक गलत फैसला मानते हैं. स्टार्मर यूरोपीय संघ (ईयू) में बिना शामिल हुए संबंध सुधारना चाहते थे, लेकिन कोविड-19 महामारी, यूक्रेन और ईरान के युद्धों के कारण उन्हें आर्थिक मोर्चे पर कदम उठाने की राजनीतिक गुंजाइश नहीं मिली. व्यापार, कृषि और सीमा नियंत्रण जैसे जटिल मुद्दों के कारण 'यूके-ईयू रीसेट' वार्ताएं उलझी रहीं.
पारंपरिक दो-दलीय वर्चस्व को चुनौती
लेबर पार्टी की कमजोरी का सीधा फायदा दक्षिणपंथी और अन्य छोटी पार्टियों को मिला है: ब्रेक्सिट समर्थक नेता नाइजेल फराज ने अप्रवासन विरोधी बयानों के दम पर अपनी स्थिति मजबूत की है और वे 2029 के आम चुनाव के लिए पारंपरिक लेबर और कंजर्वेटिव के दो-दलीय वर्चस्व को कड़ी चुनौती दे रहे हैं.
ग्रीन पार्टी का उभार: वाम-उदारवादी मतदाता स्टार्मर से निराश होकर ग्रीन पार्टी (ज़ैक पोलान्स्की के नेतृत्व में) की तरफ झुके हैं, जो फिलिस्तीनी अधिकारों और अमीरों पर टैक्स लगाने की बात करती है.
विदेश नीति बनाम घरेलू विफलताएं
यद्यपि स्टार्मर ने विदेश नीति के मोर्चे पर कुछ सफलताएं हासिल कीं—जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अच्छे संबंध (फरवरी 2026 में ईरान युद्ध से पहले तक), भारत के साथ बड़ा व्यापार समझौता और ईयू के साथ बातचीत की शुरुआत—लेकिन ये सफलताएं घरेलू मोर्चे की नाकामियों को छिपा नहीं सकीं. उनका कार्यकाल नीतिगत यू-टर्न, अंदरूनी कलह और बार-बार होने वाले इस्तीफों से प्रभावित रहा.
आखिरी कील
हाल ही में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहाँ पार्टी ने 1,100 काउंसिल सीटें और 30 से अधिक काउंसिलों पर से अपना नियंत्रण खो दिया. इसके तुरंत बाद, संसदीय उपचुनाव में ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम ने रिफॉर्म यूके के दक्षिणपंथी उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की. बर्नहैम की इस जीत और पार्टी के भीतर बढ़ते विरोध ने कीर स्टार्मर को अंततः इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया.

