यूपी में मुस्लिम धर्मगुरु को मारपीट के बाद ट्रेन से बाहर फेंका गया; पोस्टमार्टम में सभी पसलियों में फ्रैक्चर की पुष्टि
उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में 27 अप्रैल 2026 को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने कानून-व्यवस्था और रेल यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बिहार के किशनगंज के रहने वाले 29 वर्षीय इमाम मोहम्मद तौसीफ रजा का शव बरेली में रेलवे पटरियों के पास पाया गया. परिवार का आरोप है कि उनकी मौत कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि ट्रेन के भीतर भीड़ द्वारा की गई 'लिंचिंग' का परिणाम है.
मौत से पहले की आखिरी पुकार
‘द वायर’ में आकांक्षा कुमार की लंबी रिपोर्ट कहती है कि तौसीफ रजा बरेली में आयोजित वार्षिक उर्स में शामिल होकर ऋषिकेश-मुजफ्फरपुर स्पेशल ट्रेन से अपने घर लौट रहे थे. 26 अप्रैल की रात लगभग 9:45 बजे उन्होंने अपनी पत्नी तबस्सुम को तीन बार कॉल किया. यह कॉल सामान्य हाल-चाल जानने के लिए नहीं, बल्कि मदद की आखिरी गुहार थी. 29 सेकंड की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और एक वीडियो कॉल के जरिए तौसीफ ने बताया कि ट्रेन में कुछ लोग उनके साथ मारपीट कर रहे हैं.
पूर्व विधायक मुजाहिद आलम के अनुसार, तौसीफ ने अपनी पत्नी को स्थानीय सुरजापुरी बोली में बताया था कि ट्रेन में कुछ लोग नशे की हालत में हैं और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. तौसीफ ने अपनी पत्नी से जल्द से जल्द शाहजहाँपुर पुलिस को फोन करने को कहा था. वीडियो कॉल के दौरान तबस्सुम ने देखा कि कुछ लोग तौसीफ का कॉलर पकड़कर उन्हें थप्पड़ मार रहे थे और उनकी टोपी गिर चुकी थी. इसके तुरंत बाद मोबाइल स्क्रीन काली हो गई और संपर्क टूट गया.
परिवार का संघर्ष और पुलिस की सूचना
अगली सुबह तक तौसीफ का कोई पता नहीं चला. 27 अप्रैल की सुबह जब परिवार ने उनके नंबर पर फिर से कॉल किया, तो पुलिस ने फोन उठाया और बताया कि तौसीफ की हालत गंभीर है. कुछ ही देर बाद पुलिस ने उनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी. तौसीफ के पिता मोहम्मद अबुल हुसैन और भाई तौहीद रजा के लिए यह खबर वज्रपात जैसी थी. तौहीद जब बरेली पहुंचे, तो उन्होंने शव की हालत देखकर ही हत्या का संदेह जताया. शरीर पर जगह-जगह गहरे जख्म थे और हाथ-पैर टूटे हुए थे.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे
'द वायर' द्वारा प्राप्त पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने परिवार के संदेह को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया. डॉ. आशुतोष पाराशरी द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट के अनुसार, शरीर की सभी पसलियां टूटी हुई पाई गईं, जो किसी भीषण प्रहार या कुचलने का संकेत देती हैं. दोनों फेफड़े फटे हुए थे और मौत का कारण "रक्तस्रावी शॉक और कोमा" बताया गया. सिर के पिछले हिस्से पर 12 सेमी लंबा गहरा घाव, कंधे पर चोट और हाथ की हड्डी टूटी हुई थी.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेडिकल ऑफिसर ने इन चोटों को "एंटीमॉर्टम" (मृत्यु से पहले की) बताया है, जो पुलिस के "ट्रेन से गिरने" वाले तर्क को कमजोर करता है.
पुलिस का पक्ष और विरोधाभास
शुरुआत में बरेली पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रही मारपीट की खबरों को "भ्रामक" बताया था. पुलिस का आधिकारिक तर्क था कि अत्यधिक गर्मी के कारण तौसीफ गेट के पास बैठे थे और ऊंघने (झपकी आने) की वजह से संतुलन खोकर गिर गए. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 'सभी पसलियों के टूटने' और 'सिर के पीछे गहरे घाव' की मौजूदगी ने इस तर्क पर सवाल खड़े कर दिए. बाद में, बरेली के एसपी मानुष पारीक ने स्वीकार किया कि परिवार अब हत्या का संदेह जता रहा है और शिकायत मिलने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मृतक की पत्नी तबस्सुम ने स्थानीय मीडिया को बताया कि हमलावर उन पर चोरी का आरोप लगा रहे थे. तौसीफ ने अपना बैग खोलकर उन्हें दिखाया भी था कि वह एक मदरसा शिक्षक हैं और उनके पास केवल किताबें हैं. परिवार का तर्क है कि अगर यह महज एक दुर्घटना होती, तो तौसीफ का मोबाइल फोन बिल्कुल सुरक्षित और बिना किसी खरोंच के कैसे मिलता? मोबाइल का सही-सलामत मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि उनके साथ मारपीट ट्रेन के अंदर हुई और बाद में उन्हें नीचे फेंक दिया गया.
इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है. भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रेल मंत्री से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. 'ऑल इंडिया मुस्लिम जमात' ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की है. मुस्लिम संगठनों का कहना है कि ट्रेनों में विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाने वाली यह कोई पहली घटना नहीं है, और यदि इसे दुर्घटना बताकर रफा-दफा किया गया, तो यह न्याय के साथ अन्याय होगा.
कुलमिलाकर, तौसीफ रजा की मौत की गुत्थी अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ऑडियो रिकॉर्डिंग के इर्द-गिर्द सिमट गई है. एक तरफ पुलिस का 'हादसा' वाला दावा है, तो दूसरी तरफ 'सभी पसलियों का टूटना' और 'मदद की आखिरी पुकार' जैसे ठोस तथ्य हैं. दो साल पहले शादी के बंधन में बंधे तौसीफ की 'शुभ यात्रा' का अंत एक भयावह त्रासदी में हुआ, जो भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर एक काला धब्बा है. अब गेंद पुलिस के पाले में है कि वह इसे निष्पक्ष जांच के जरिए सुलझाती है या इसे महज एक "इत्तफाकिया मौत" करार देती है.

