उज्जैन की शाही मस्जिद का हिस्सा खुद हटाने को मजबूर हुए मुस्लिम, बोले—प्रशासन ने धोखा दिया
‘मकतूब’ में ग़ज़ाला अहमद की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने को लेकर तनाव बना हुआ है. मस्जिद के पास तीन रातों तक पहरा देने के बाद सोमवार को स्थानीय स्वयंसेवकों ने करीब तीन फीट का हिस्सा खुद हटाना शुरू किया. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन के साथ तय सहमति का पालन नहीं किया गया और बुलडोजर कार्रवाई के डर से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा.
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 27 सितंबर की रात मस्जिद की नुमाइंदा कमेटी और प्रशासन के बीच सहमति बनी थी कि मस्जिद की लटकती छज्जेनुमा पटिया का तीन फीट हिस्सा हटाया जाएगा. यह हिस्सा दुकानों के ऊपर है और यहां नमाज अदा नहीं की जाती. कमेटी ने यह हिस्सा स्वयं हटाने पर सहमति जताई थी, जबकि प्रशासन की ओर से आठ फीट हिस्सा हटाने की मांग की जा रही थी.
स्थानीय लोगों के अनुसार, 28 सितंबर को फज्र की नमाज के बाद लोग अपने घर लौट गए. लेकिन सुबह करीब आठ बजे प्रशासनिक अधिकारी मस्जिद के पास पहुंचे और चिह्नित हिस्से को तुरंत हटाने की चेतावनी दी. लोगों ने आरोप लगाया कि मस्जिद के चारों ओर बैरिकेडिंग कर दी गई और भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर तथा पोकलेन मशीनें तैनात की गईं. इसके बाद भीड़ फिर जमा हुई और पुलिस ने उसे हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया.
एक निवासी ने कहा कि जब कमेटी ने तय हिस्से को खुद हटाने की बात मान ली थी, तो बुलडोजर क्यों लाए गए. स्थानीय लोगों ने मस्जिद की मीनार को लेकर भी प्रशासन के आश्वासनों में अंतर होने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक, पहले नई मीनार बनाने और फिर पुरानी मीनार हटाने की बात हुई थी, लेकिन प्रशासन इस व्यवस्था से सहमत नहीं था.
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने एएनआई को बताया कि मुस्लिम समुदाय और मस्जिद कमेटी ने सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण क्षेत्र में आने वाले हिस्से को आपसी सहमति और सहयोग से हटाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने स्थिति का फायदा उठाकर अशांति फैलाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया. पुलिस के मुताबिक, जिले के बाहर से आए पांच लोगों को शांति भंग करने की आशंका में हिरासत में लिया गया है. शर्मा ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह और भड़काऊ सामग्री डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 100 वर्ष पुरानी शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की अनुमति दी है. यह परियोजना 2028 के सिंहस्थ कुंभ से पहले उज्जैन में सड़क चौड़ी करने के लिए शुरू की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, स्वयंसेवक सहमति वाले तीन फीट हिस्से को हटाने में जुटे रहे, जबकि लोग मस्जिद के भीतर और आसपास मौजूद थे. उनका कहना था कि मस्जिद के चारों ओर अब भी बुलडोजर तैनात हैं और उन्हें आशंका है कि प्रशासन बड़ा हिस्सा भी गिरा सकता है. इस कारण इलाके में तनाव बना हुआ है.

