कश्मीरी पंडितों ने ‘सामान्य स्थिति’ के दावों को नकारा; खतरे व राज्य से एक और पलायन के डर को किया रेखांकित
एक सरकारी कार्यक्रम के तहत घाटी वापस लौटे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कहा है कि उनका "सामाजिक पुनर्वास और स्वीकृति" उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ी है.
मुज़फ़्फ़र रैना की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे समय में जब केंद्र सरकार क्षेत्र में सामान्य स्थिति की तस्वीर पेश करने के लिए उत्सुक है, इस पत्र में कहा गया है कि कश्मीर में "अनिश्चितता का माहौल" इस प्रक्रिया को बेहद कठिन बनाता है. पत्र में उग्रवादियों द्वारा हाल ही में "धमकी भरे पत्रों और डराने-धमकाने के मामलों में वृद्धि" को रेखांकित किया गया है, 1990 के पलायन के दोहराव की आशंका व्यक्त की गई है और वापस लौटे पंडितों की सुरक्षा की मांग की गई है.
उग्रवादियों के धमकी भरे पत्रों में कुछ पंडितों के नाम और उनमें से कम से कम एक के वाहन का पंजीकरण नंबर (रजिस्ट्रेशन नंबर) दर्ज था, जिसके बाद यह जांच करने की मांग की जा रही है कि उन्हें यह जानकारी कौन लीक कर रहा था. इस समुदाय के लिए वापसी और पुनर्वास नीति के तहत कश्मीर में लगभग 6,000 पंडितों को नौकरियां दी गई थीं.
'ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम' के अध्यक्ष सनी रैना द्वारा अमित शाह को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कई पंडित परिवार अपनी सुरक्षा और कश्मीर में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं.
पत्र में कहा गया है, "हममें से कई लोगों के मन में यह धारणा भी है कि हमारे पूर्ण सामाजिक पुनर्वास और स्वीकृति की प्रक्रिया उस तरह आगे नहीं बढ़ी है जैसी हमने उम्मीद की थी. हम यहां अपना जीवन फिर से बसाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अनिश्चितता का माहौल इस प्रक्रिया को बेहद कठिन बना देता है."
पत्र में आगे कहा गया है: "पिछले 16 वर्षों से, हम कश्मीर में खुद को फिर से बसाने और अपनी मातृभूमि में अपना जीवन फिर से बनाने का एक ईमानदार लेकिन बेहद कठिन प्रयास कर रहे हैं... और शांतिपूर्वक रहने, ईमानदारी से काम करने तथा एक बार फिर घाटी के सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा बनने का हर संभव प्रयास किया है.
"हालांकि, 2021 के बाद से, नागरिकों और कश्मीरी हिंदू समुदाय के सदस्यों की लक्षित हत्याओं (टारगेटेड किलिंग) ने हमारे परिवारों के बीच डर की एक गहरी भावना पैदा कर दी है."
2019 के संवैधानिक बदलावों के बाद कश्मीर के बाहर के लोगों—मुस्लिमों और हिंदुओं दोनों—और कश्मीरी पंडितों पर उग्रवादी हमले फिर से शुरू हो गए हैं, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है. मृतकों में "पीएम पैकेज" के तहत नियुक्त कर्मचारी राहुल भट और एक भाजपा नेता सहित लगभग आधे दर्जन पंडित शामिल हैं.
शाह को लिखे रैना के पत्र में वर्तमान स्थिति और 1990 के बीच समानताएं दर्शाई गई हैं, जब उग्रवादी हमलों ने पंडितों को घाटी से पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया था.
पत्र में कहा गया है, "धमकी भरे पत्र और नोटिस उन शुरुआती चेतावनी संकेतों में शामिल थे जिन्होंने कश्मीरी हिंदू परिवारों के बीच डर पैदा किया और उस माहौल में योगदान दिया जिसका अंतिम परिणाम उनका सामूहिक विस्थापन था. हाल ही की ऐसी हर घटना 1990 के दशक की दर्दनाक यादों को ताजा कर देती है और यह जायज चिंता पैदा करती है कि कश्मीरी हिंदुओं को एक बार फिर अपनी मातृभूमि से विस्थापित होने के लिए मजबूर किया जा सकता है. "
पत्र में जोर देकर कहा गया है कि हालांकि सतह पर स्थिति सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन जमीनी स्तर पर "बेचैनी और तनाव की भावना बनी हुई है."

