2026 में नगा सशस्त्र समूहों द्वारा कुकी समुदाय के 22 से अधिक लोग मारे गए: कुकी-ज़ो परिषद

कुकी-ज़ो परिषद ने सोमवार को मणिपुर के तमेंगलॉन्ग और नोने जिलों में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा चार लोगों की हत्या की कड़ी निंदा की.  परिषद ने कहा कि सशस्त्र समूहों की गतिविधियां आम नागरिकों को खतरे में डाल रही हैं और राज्य को पूर्ण पैमाने पर संघर्ष (फुल-स्केल कॉन्फ्लिक्ट) के जोखिम में धकेल रही हैं.

‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के मुताबिक, संस्था ने आरोप लगाया कि 2026 की शुरुआत से अब तक "मणिपुर में सक्रिय नगा सशस्त्र समूहों" द्वारा महिलाओं और बच्चों सहित 22 से अधिक कुकी-ज़ो समुदाय के सदस्य मारे जा चुके हैं.

एक बयान में, कुकी-ज़ो परिषद ने नगा-कुकी-ज़ो हिंसा को समाप्त करने के लिए "अर्थपूर्ण सुलह और बातचीत को आगे बढ़ाने की राजनीतिक व नागरिक समाज के नेताओं की अनिच्छा" की आलोचना की.

परिषद ने कहा, "भारत सरकार को निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए और उग्रवादियों को मणिपुर में बेखौफ होकर काम करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. सशस्त्र समूहों की लगातार गतिविधियां नागरिकों को खतरे में डालती हैं और मणिपुर को एक और बड़े संघर्ष की ओर धकेलने का जोखिम पैदा करती हैं."

इस बीच, तीन कुकी विधायकों ने इन हत्याओं की निंदा की है. एल. टॉलेन विलेज अथॉरिटी ने भी हमले की निंदा की और इसके लिए नगा उग्रवादी समूहों एनएससीएन-आईएम और जेडयूएफ-के को जिम्मेदार ठहराया.

अथॉरिटी ने आरोप लगाया कि "उनके (एनएससीएन-आईएम के) 'ग्रेटर नगालिम' एजेंडे को पूरा करने के लिए कुकी-ज़ो ग्रामीणों को हमारी पैतृक भूमि से डराने, बेदखल करने और उनका जातीय सफाया (एथनिक क्लींजिंग) करने का एक व्यवस्थित और जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है."

1997 से केंद्र के साथ शांति वार्ता में शामिल एनएससीएन-आईएम लगातार एक एकीकृत नगालिम की मांग कर रहा है, जो नगालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, असम और म्यांमार के नगा-बहुल क्षेत्रों से मिलकर बना है. मणिपुर, अरुणाचल और असम इस मांग का विरोध कर रहे हैं.

यह हत्याएं "साहनिट नी" यानी "ब्लैक डे" के दिन ही हुईं, जिसे 1990 के दशक में राज्य में कुकी-नगा संघर्ष के दौरान हुई जातीय हिंसा के पीड़ितों को याद करने के लिए मणिपुर में कुकी समुदाय द्वारा हर साल 13 सितंबर को मनाया जाता है.

13 मई को कुकी-बहुल कांगपोकपी जिले में तीन कुकी-ज़ो चर्च नेताओं की घात लगाकर की गई हत्या के बाद से अब तक अज्ञात हमलावरों द्वारा कम से कम 25 कुकी-ज़ो और नगा नागरिकों की हत्या की जा चुकी है. नगा संगठन और विधायक 13 मई को ही कांगपोकपी में अगवा किए गए और बाद में मारे गए छह नगा पुरुषों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं.

प्रत्येक पक्ष हिंसा के लिए दूसरे समुदाय के हितों की वकालत करने वाले उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराता है.

नगा और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच यह संघर्ष उस राज्य में तनावपूर्ण स्थिति को रेखांकित करता है, जो 3 मई 2023 से शुरू हुई मैतेई-कुकी अशांति की आग से पहले से ही जूझ रहा है.

घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ियों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग अब भी लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.

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मणिपुर में बंदूकधारियों ने 4 कुकी-ज़ो नागरिकों की हत्या की