अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए बदले वीज़ा नियम. पहले से रह रहे भारतीय छात्रों पर क्या होगा असर?
'द इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, अमेरिका ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए लागू एक महत्वपूर्ण वीज़ा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (डी/एस)" व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है. इसके साथ ही अब विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि अनिश्चितकालीन न होकर निश्चित समय के लिए तय होगी. नए नियम 15 सितंबर से लागू होंगे और इनका सबसे अधिक असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो पहले से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं.
क्या थी "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस" व्यवस्था?
अमेरिका में पढ़ने जाने वाले अधिकांश अंतरराष्ट्रीय छात्र एफ-1 (शैक्षणिक) वीज़ा पर जाते हैं, जबकि शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में शामिल लोग जे-1 वीज़ा का इस्तेमाल करते हैं. अब तक इन दोनों श्रेणियों के वीज़ाधारकों को "ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस" यानी डी/एस के तहत प्रवेश दिया जाता था. इसका अर्थ था कि उनके रहने की कोई निश्चित अंतिम तारीख तय नहीं होती थी.
जब तक छात्र अपनी पढ़ाई जारी रखते थे और उनका छात्र दर्जा वैध रहता था, तब तक वे अमेरिका में रह सकते थे. यदि पढ़ाई पूरी करने में अतिरिक्त समय लगता, तो विश्वविद्यालय के अधिकृत अधिकारी उनकी अवधि बढ़ा सकते थे. इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी विश्वविद्यालयों के नामित अधिकारी और डीएचएस की स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एसईवीआईएस) के माध्यम से होती थी.
अब क्या बदलेगा?
नए नियम के तहत अधिकांश छात्रों को उनके शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि के अनुरूप निश्चित समय के लिए प्रवेश मिलेगा. हालांकि, शुरुआती प्रवेश की अधिकतम सीमा चार वर्ष होगी.
यदि किसी छात्र को डिग्री पूरी करने में चार वर्ष से अधिक समय लगता है, तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से औपचारिक रूप से प्रवास अवधि बढ़ाने की अनुमति लेनी होगी. पहले यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय स्तर पर अपेक्षाकृत सरल थी.
इसके अलावा, पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका छोड़ने या किसी अन्य वीज़ा श्रेणी में आवेदन करने के लिए मिलने वाली छूट अवधि भी 60 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दी गई है.
मीडिया वीज़ा पर भी असर
नए नियम केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं. आई श्रेणी के वीज़ा पर अमेरिका जाने वाले विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के लिए भी रहने की अवधि अधिकतम 240 दिन कर दी गई है. वहीं चीनी नागरिकों के लिए यह सीमा केवल 90 दिन होगी.
अमेरिकी सरकार ने क्या वजह बताई?
डीएचएस का कहना है कि यह बदलाव अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था की विश्वसनीयता मजबूत करने, वीज़ा के दुरुपयोग को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया गया है. विभाग के अनुसार, लगभग पांच दशक पुरानी डी/एस व्यवस्था के कारण कुछ लोग लगातार नए पाठ्यक्रमों में दाखिला लेकर वर्षों तक अमेरिका में बने रहते थे और आव्रजन नियमों का दुरुपयोग करते थे.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि निश्चित अवधि वाले प्रवेश से नियमित जांच, पृष्ठभूमि सत्यापन और सुरक्षा परीक्षण आसान होंगे.
भारतीय छात्रों पर कितना असर?
जनवरी 2025 तक अमेरिका में लगभग तीन लाख भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे थे. इनमें अधिकांश छात्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों में स्नातकोत्तर स्तर की पढ़ाई कर रहे हैं.
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, 2024 में 90,129 भारतीय छात्रों को एफ श्रेणी का छात्र वीज़ा, 15,208 लोगों को जे श्रेणी का एक्सचेंज विज़िटर वीज़ा और 426 लोगों को आई श्रेणी का मीडिया वीज़ा जारी किया गया था.
क्या इस साल के नए दाखिलों पर असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष के फॉल सेमेस्टर में दाखिला लेने वाले छात्रों की प्रक्रिया पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अधिकांश प्रवेश और वीज़ा प्रक्रियाएं 15 सितंबर से पहले पूरी हो जाएंगी.
हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों की भूमिका सीमित होगी और वीज़ा अवधि बढ़ाने जैसे मामलों में संघीय एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाएगी. इसके साथ ही बायोमेट्रिक जांच, पृष्ठभूमि सत्यापन और धोखाधड़ी की जांच जैसी प्रक्रियाएं भी अधिक सख्त होंगी.
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि नियमों के कई पहलुओं पर अभी स्पष्टता नहीं है. वास्तविक स्थिति तब सामने आएगी जब ये प्रावधान सितंबर के मध्य से लागू होने लगेंगे. लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि नए नियम विशेष रूप से उन छात्रों के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक चुनौतियां पैदा कर सकते हैं जो पहले से अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं.

