केंद्र द्वारा नया कानून लागू करने के बाद मनरेगा रोजगार में भारी गिरावट

मनरेगा के तहत रोजगार सृजन में वर्ष 2025-26 में भारी गिरावट आई है. यह वही वर्ष है जब केंद्र ने मनरेगा को निरस्त कर उसके स्थान पर 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (वीबी-जी राम जी) अधिनियम लागू किया. लिबटेक इंडिया के शोधकर्ता मुक्केरा राहुल ने कहा कि 2025-26 को मनरेगा के तहत रोजगार सृजन के लिए सबसे कठिन वर्षों में से एक के रूप में देखा जा सकता है.

राहुल ने कहा, "हमने हाल के वर्षों में देखा है कि मनरेगा के तहत आवंटन स्थिर बना हुआ है, जबकि सरकार ने सुधारों और भ्रष्टाचार को खत्म करने के नाम पर कई हस्तक्षेप पेश किए हैं. ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली, ई-केवाईसी पंजीकरण और आधार आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) ने श्रमिकों के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. फंड की कमी और तकनीकी हस्तक्षेप, दोनों कारकों ने रोजगार योजना के तहत रोजगार सृजन में आई भारी गिरावट में योगदान दिया होगा."

‘द टेलीग्राफ’ में बसंत कुमार मोहंती की रिपोर्ट के अनुसार, नरेगा मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) के तहत, पंचायत स्तर के अधिकारियों को श्रमिकों की तस्वीरें लेनी होती हैं और उन्हें ऐप पर अपलोड करना होता है. पहले, ग्राम पंचायतें कागज पर उपस्थिति दर्ज करती थीं, जिसे जनवरी 2023 से बंद कर दिया गया था.

फरवरी 2023 से, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों के लिए मजदूरी भुगतान के लिए एबीपीएस का उपयोग करना अनिवार्य कर दिया था. एबीपीएस के लिए, एक श्रमिक के आधार को उसके जॉब कार्ड, बैंक खाते और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा बनाए गए डेटाबेस में बैंक के संस्थागत पहचान संख्या के साथ जोड़ना (सीडिंग) आवश्यक है.

नवंबर 2025 से, सरकार ने मनरेगा श्रमिकों के लिए काम पाने हेतु ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया. ई-केवाईसी चेहरे और आईरिस (पुतली) की पहचान के माध्यम से की जाती है और यह सुविधा एनएमएमएस ऐप का हिस्सा है.

रिपोर्ट में पाया गया कि मई 2026 में 25 करोड़ श्रमिकों में से 45.4 प्रतिशत और लगभग 10 करोड़ सक्रिय श्रमिकों में से 9.5 प्रतिशत ने ई-केवाईसी पूरा नहीं किया था. राहुल ने कहा कि श्रमिकों को इन तकनीकी हस्तक्षेपों का पालन करना कठिन लगा.

मनरेगा एक वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों तक के अकुशल कार्य का प्रावधान करता है. निजी शोध संगठन लिबटेक इंडिया द्वारा जारी "वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के तहत घटते रोजगार और कमाई" शीर्षक वाली एक राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा के तहत सृजित कुल कार्यदिवस 2023-24 में 312 करोड़ से घटकर 2024-25 में 268 करोड़ और 2026-27 में 211 करोड़ रह गए. प्रति परिवार औसत कार्यदिवस 2024-25 में 50.18 से काफी गिरकर 2025-26 में 42.92 रह गया. जहाँ 2024-25 में 0.37 करोड़ परिवारों ने 100 दिनों का काम पूरा किया था, वहीं 2025-26 में ऐसे परिवारों की संख्या घटकर 0.22 करोड़ रह गई.

मनरेगा के तहत पंजीकृत परिवारों की संख्या 2024-25 में 14.98 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 15.46 करोड़ हो गई. योजना में अधिक परिवारों द्वारा रुचि दिखाने के बावजूद, रोजगार तक पहुंच कम हो गई. 2024-25 की तुलना में, 2025-26 में लगभग 44 लाख कम परिवारों और 67 लाख कम श्रमिकों को मनरेगा के तहत रोजगार मिला.

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