'बार एंड बेंच' के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के थोक में आवेदन जमा किए जाने की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्वाचन आयोग से जांच कर जरूरी कदम उठाने को कहा.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अब तक सामने आई अनियमितताओं का ब्योरा एक नोट के रूप में निर्वाचन आयोग को सौंपें. अदालत ने आयोग से कहा कि नोट मिलने के बाद वह तथ्यों की जांच करे, जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करे.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि पांच अगस्त को अदालत ने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के पास फॉर्म-7 जमा किए जाने से संबंधित अंतरिम आवेदन पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था. उस समय छत्तीसगढ़, केरल और उत्तर प्रदेश से जुड़े मामले अदालत के सामने थे. वकील के मुताबिक, छत्तीसगढ़ और केरल से संबंधित मुद्दों का समाधान हो चुका है, जबकि फॉर्म-7 से जुड़ी शिकायत उत्तर प्रदेश की है.
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने स्वीकार किया कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए गए थे. हालांकि, उन्होंने कहा कि आयोग के अधिकारियों ने इन आवेदनों की जांच और दोबारा पड़ताल की थी. जांच में वे फर्जी पाए गए, इसलिए उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया कि एक निर्वाचन क्षेत्र में किसी विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए उनके खिलाफ 32 फॉर्म जमा किए गए थे. निर्वाचन आयोग के हलफनामे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद दो फॉर्म पर बीएलओ के हस्ताक्षर थे. उन्होंने इन दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां होने का भी दावा किया.
वकील ने कहा कि तेलंगाना और कर्नाटक में भी इसी तरह के मामले सामने आए थे, जहां प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए. लेकिन उत्तर प्रदेश में कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनके मुताबिक, कार्रवाई न होने से ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों का हौसला बढ़ा और यह एक सुनियोजित प्रयास का हिस्सा है.
इस पर डी.एस. नायडू ने कहा कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों की जांच तभी कर सकता है, जब कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाए. उन्होंने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई है, तो शिकायत दर्ज कराई जाए, जिसके बाद आयोग मामले की जांच करेगा.
केरल में एसआईआर की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केरल में एसआईआर सत्यापन की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार कराने और नए नाम शामिल कराने के अनुरोधों पर प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जिन लोगों को अब भी मौका दिए जाने की जरूरत है, उनके बारे में निर्वाचन आयोग को अभ्यावेदन के जरिए जानकारी दी जा सकती है. उन्होंने कहा कि अदालत आयोग को ऐसे अनुरोधों की जांच करने का निर्देश देगी और इस मामले को लंबित रखेगी.

