‘अगर भारत नहीं तो कौन, अगर अभी नहीं तो कब?’ फिलिस्तीन ने भारत से मांगी तत्काल मदद

‘द वायर’ के मुताबिक, नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम.ए. अबुशावेश ने भारत सरकार, चिकित्सा संस्थानों और नागरिक समाज से फिलिस्तीन के स्वास्थ्य क्षेत्र को बचाने के लिए तत्काल सहायता की अपील की. उन्होंने कहा कि इजरायली हमलों के कारण फिलिस्तीन का स्वास्थ्य तंत्र गंभीर संकट में है और समय पर मदद मिलने पर हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है.

अबुशावेश ने कहा, “अगर भारत और भारतीय लोग नहीं, तो कौन? और अगर अभी नहीं, तो कब?” उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन इस समय केवल राजनीतिक संघर्ष का नहीं, बल्कि एक बड़ी मानवीय और स्वास्थ्य आपदा का सामना कर रहा है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहराता संकट

राजदूत ने बताया कि फिलिस्तीन में अस्पतालों को बुनियादी चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. एनेस्थीसिया, एंटीबायोटिक्स, डायलिसिस सामग्री, रक्त इकाइयों, सर्जिकल उपकरणों और अस्पतालों के जनरेटर चलाने के लिए ईंधन जैसी आवश्यक चीजें तेजी से खत्म हो रही हैं.

फिलिस्तीनी दूतावास के अनुसार, पिछले वर्ष वेस्ट बैंक के सरकारी अस्पतालों में लगभग 65 हजार सर्जरी हुई थीं. लेकिन इस वर्ष अब तक केवल 19,500 सर्जरी हो सकी हैं, जबकि दवाओं और संसाधनों की कमी के कारण 11 हजार से अधिक निर्धारित ऑपरेशन टालने पड़े हैं.

अबुशावेश ने कहा कि विस्थापन शिविरों में बढ़ती भीड़, खराब स्वच्छता व्यवस्था और साफ पानी की कमी ने हालात को और गंभीर बना दिया है.

युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा

राजदूत ने आरोप लगाया कि गाजा शांति योजना लागू होने के बावजूद इजरायल ने युद्धविराम का पालन नहीं किया. उनके अनुसार समझौते पर हस्ताक्षर के बाद भी एक हजार से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं.

उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के कई हिस्सों में मानवीय संकट अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुका है. उनके मुताबिक चिकित्सा ढांचे का विनाश, लगातार सैन्य हमले और आर्थिक दबाव ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लगभग ठप कर दिया है.

अबुशावेश ने कहा कि फिलिस्तीन की बड़ी आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है. युद्ध और आर्थिक संकट के कारण लाखों लोग निजी इलाज कराने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है.

भारत से सहयोग की उम्मीद

राजदूत ने भारत और फिलिस्तीन के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दे का समर्थन करता रहा है. उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों, फिलिस्तीन मुक्ति संगठन को भारत की मान्यता और संयुक्त राष्ट्र में दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन का जिक्र किया.

उन्होंने कहा कि भारत पहले भी गाजा को चिकित्सा सहायता भेज चुका है. साथ ही उन्होंने उस अस्पताल परियोजना का उल्लेख किया जिसकी घोषणा 2017 में की गई थी और जिसके पूरा होने की अभी भी प्रतीक्षा है. हाल ही में भारत द्वारा फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए जारी 25 लाख डॉलर की सहायता का भी उन्होंने स्वागत किया.

मीडिया और नागरिक समाज से अपील

अबुशावेश ने भारतीय मीडिया, युवाओं और सामाजिक संगठनों से फिलिस्तीन के मानवीय संकट को प्रमुखता से उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक या कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवता और नैतिक जिम्मेदारी का सवाल है.

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मैत्री’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने मानवीय संकट झेल रहे देशों को चिकित्सा सहायता देने का संकल्प लिया था. उनके अनुसार फिलिस्तीन आज ऐसे ही एक संकट से गुजर रहा है और यह वह समय है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से भारत, मदद के लिए आगे आ सकता है.

Previous
Previous

वीवीपी शर्मा | संस्थापक और उत्तराधिकारी: संकट क्यों बन जाता है राजनीतिक उत्तराधिकार

Next
Next

तीन भारतीयों की मौत पर क्या अमेरिका से जवाब मांग पाए मोदी?