ईरान युद्ध लंबा खिंचने के कारण भारत ने अमेरिका से रूसी तेल पर छूट बढ़ाने की मांग की: रिपोर्ट

ब्लूमबर्ग न्यूज ने गुरुवार को इस मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया कि भारत ने अमेरिका से रूसी तेल पर अपनी छूट की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है. यह मांग फारस की खाड़ी में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आ रहे व्यवधानों के बीच की गई है.

हालांकि ‘रॉयटर्स’ इस रिपोर्ट की तत्काल पुष्टि नहीं कर सका है. ब्लूमबर्ग ने गुरुवार को यह भी बताया कि एलपीजी से लदे दो जहाज, 'सिमी' और 'एनवी सनशाइन', "होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते हुए प्रतीत होते हैं."

भारतीय रिफाइनरों के दृष्टिकोण से परिचित लोगों के अनुसार, अमेरिका ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह 16 मई के बाद भारत सहित अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाली छूट को आगे बढ़ाएगा या नहीं. उन्होंने बताया कि यदि छूट नहीं बढ़ाई गई, तो स्थानीय रिफाइनरों को अन्य जगहों से वैकल्पिक और अधिक महंगे तेल खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है.

हालांकि रूसी कच्चे तेल पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वाशिंगटन पहले यूक्रेन युद्ध को लेकर मास्को पर दबाव बनाने के लिए नई दिल्ली से रियायती दरों पर की जाने वाली खरीदारी में कटौती करने के लिए कहता रहा है.

यह ढील उन समझौतों को दर्शाती है जिन्हें ट्रम्प प्रशासन को तेहरान के खिलाफ अपने युद्ध के लिए अपनाना पड़ा है. यह युद्ध फरवरी में शुरू हुआ था और इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से कच्चे तेल का प्रवाह लगभग पूरी तरह बंद हो गया है.

‘द टेलीग्राफ ब्यूरो’ के अनुसार, मध्य पूर्व में संघर्ष का कोई अंत न दिखने के कारण, नई दिल्ली के अधिकारियों ने वाशिंगटन को चेतावनी दी है कि उनके लिए 'आपूर्ति' प्राथमिकता बनी हुई है, क्योंकि तेल बाजार में निरंतर अस्थिरता के व्यापक परिणाम होंगे.

वर्तमान छूट समाप्त होने से पहले भारतीय रिफाइनर रूसी तेल के आयात में पूरी ताकत लगा रहे हैं, जिससे आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. केप्लर डेटा के अनुसार, मई में अब तक दैनिक आवक अभूतपूर्व 23 लाख बैरल रही है, क्योंकि छूट ने पहले से लोड किए गए रूसी तेल के आयात की अनुमति दी थी. केप्लर के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, पूरे महीने का प्रवाह अभी भी 19 लाख बैरल प्रति दिन के पर्याप्त स्तर पर रह सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, दोनों जहाजों ने 'गो डार्क' का रास्ता अपनाया, यानी उन्होंने अपने ट्रांसपोंडर (स्थान बताने वाले उपकरण) बंद कर दिए थे.

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