राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट: स्थानीय परिवहन, भंडारण और मानवीय हस्तक्षेप ‘नीट’ की सबसे कमज़ोर कड़ियाँ
वर्ष 2024 में स्नातक के लिए राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में कथित कदाचार से जुड़े विवादों के बाद गठित के. राधाकृष्णन समिति ने स्थानीय परिवहन, भंडारण और मानवीय हस्तक्षेप को परीक्षा के संचालन में सबसे कमज़ोर कड़ियों के रूप में पहचाना है. जून 2024 में बनी इस समिति ने उसी वर्ष अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. लेकिन, केंद्र सरकार समिति की सिफारिशों के हिसाब से परीक्षा सुधारों को लागू नहीं कर पाई. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिति बनने के बाद जुलाई 2024 में पेपर लीक को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की थीं.
‘द हिंदू’ में बिंदु शाजन पेराप्पडन की रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने सलाह दी कि नीट परीक्षा चरणों में आयोजित की जानी चाहिए और पूरी तरह से पेन-एंड-पेपर (ओएमआर शीट) परीक्षा पर निर्भर रहने के बजाय कंप्यूटर/हाइब्रिड मोड अपनाया जाना चाहिए. समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के कायाकल्प की भी मांग की, साथ ही पेपर लीक के जोखिम को कम करने, लॉजिस्टिक कमियों को न्यूनतम करने, एन्क्रिप्टेड वितरण में सुधार और बेहतर ऑडिट ट्रेल (जांच प्रक्रिया) को सक्षम करने का सुझाव दिया. समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि एनटीए को स्थायी पेशेवर कर्मचारी नियुक्त करने चाहिए, बाहरी जनशक्ति (आउटसोर्सिंग) पर निर्भरता कम करनी चाहिए और जवाबदेही के तंत्र को मज़बूत करना चाहिए.
अब, दो साल बाद भी, केंद्र ने इन सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया है. नीट-यूजी भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है जो एक ही दिन, एक ही पाली में आयोजित की जाती है और इसमें लगभग 25 लाख उम्मीदवार शामिल होते हैं.
रिपोर्ट में इन बातों पर भी ज़ोर दिया गया: फर्जी उम्मीदवारों द्वारा छद्मवेश को रोकना, संगठित नकल गिरोहों पर नकेल कसना, अविश्वसनीय केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करना, डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी का उपयोग और कमांड-एंड-कंट्रोल मॉनिटरिंग के जरिए इन प्रयासों को मज़बूत करना.
रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, समिति ने हितधारकों, विशेष रूप से छात्रों और अभिभावकों से प्रतिक्रिया मांगी थी. इसमें 37,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं एकत्र की गईं, जिनमें से अधिकांश कक्षा 12 के छात्रों की थीं.
समिति ने स्पष्ट किया कि हालांकि परीक्षा प्रक्रिया में तीसरे पक्ष की भागीदारी को समाप्त करने की सिफारिश की गई है, लेकिन बुनियादी ढांचे का जिला-वार मूल्यांकन — विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में — समान रूप से महत्वपूर्ण है.
इसमें कहा गया कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) से पेपर लीक का जोखिम कम हो सकता है और बेहतर 'ऑडिट ट्रेल' (जांच प्रक्रिया) सक्षम हो सकती है.
समिति ने यह भी कहा कि एनटीए को देश में प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में चरणबद्ध तरीके से कम से कम 1,000 सुरक्षित 'मानक परीक्षा केंद्र' विकसित करने का लक्ष्य रखना चाहिए. इस प्रक्रिया के लिए 'युद्ध स्तर' पर काम करने की आवश्यकता हो सकती है." समिति ने आगे कहा कि उसने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की है जहाँ एनटीए एक चुस्त, त्रुटिहीन, अनुकूलन योग्य और एकीकृत प्रक्रिया प्रदान कर सके.
समिति ने यह भी कहा कि भारत शैक्षिक परीक्षण के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है. समिति के अनुसार, "कोई भी परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी जो भारत में राष्ट्रव्यापी परीक्षा सफलतापूर्वक संचालित करना सीख जाती है, वह एक ऐसा मज़बूत मॉडल तैयार कर लेती है जो दुनिया के अन्य हिस्सों में विभिन्न परिस्थितियों और संदर्भों में बड़े पैमाने पर काम कर सकता है." इसमें यह भी जोड़ा गया कि एक बार सरकार द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद, इन सिफारिशों को 'मिशन मोड' में लागू किया जाना चाहिए.

