भारत से जुड़े गोला-बारूद सौदे के कारण एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा
हथियारों के कारोबार में बिना किसी पूर्व अनुभव वाली भारत-नियंत्रित कंपनी के साथ 7 करोड़ यूरो का तोपखाने गोला-बारूद का सौदा एक बड़े घोटाले में बदलने के बाद एस्टोनिया के रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा है.
परन बालाकृष्णन की रिपोर्ट के अनुसार, एस्टोनिया के सार्वजनिक प्रसारक की अंग्रेजी भाषा सेवा 'ईआरआर' ने रक्षा मंत्री हन्नो पेवकुर को पद छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने के बाद इसे "रक्षा खरीद घोटाला" करार दिया. हालांकि, पेवकुर ने जोर देकर कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से इस सौदे के लिए दोषी नहीं थे.
इस विवाद के केंद्र में 'डेटासेल' है, जो भारत के नेको ग्रुप के स्वामित्व वाली एक छोटी इतालवी कंपनी है. नेको ग्रुप का नियंत्रण नागपुर स्थित जायसवाल परिवार के पास है. एस्टोनिया का कहना है कि डेटासेल समय पर अधिकांश गोला-बारूद की आपूर्ति करने में विफल रही. इसका यह भी दावा है कि जो कुछ गोला-बारूद पहुंचा, उनमें से कुछ आवश्यक मानकों पर खरे नहीं उतरे.
डेटासेल ने स्वीकार किया कि देरी हुई थी, लेकिन उसने इस बात का पुरजोर खंडन किया कि उसके उत्पाद घटिया स्तर के थे. अब यह विवाद अदालतों तक पहुँच गया है.
डेटासेल का कहना है कि वह पहले ही 5.9 करोड़ यूरो मूल्य के गोला-बारूद और संबंधित सामान की आपूर्ति कर चुकी थी और यदि एस्टोनिया ने अनुबंधों को रद्द न किया होता, तो वह शेष आपूर्ति भी पूरी कर लेती.
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: तोपखाने के गोला-बारूद की आपूर्ति का कोई पूर्व रिकॉर्ड न रखने वाली एक छोटी सी कंपनी ने 7 करोड़ यूरो का अनुबंध कैसे हासिल कर लिया?
डेटासेल को नेको ग्रुप द्वारा मार्च 2024 में 'नेको डिफेंस मुनिशन' (एक भारतीय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी) के माध्यम से खरीदा गया था.
अधिग्रहण से पहले, डेटासेल ने रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में काम किया था, लेकिन वह कभी भी तोपखाने के गोला-बारूद की आपूर्ति में शामिल नहीं रही थी. ईआरआर के अनुसार, न तो डेटासेल और न ही नेको डिफेंस के पास इस प्रकार के अनुबंधों का कोई पूर्व अनुभव था. इसके बावजूद, अधिग्रहण के महज कुछ महीनों बाद ही डेटासेल ने एस्टोनियाई गोला-बारूद के बड़े अनुबंध जीतने शुरू कर दिए. ऐसा प्रतीत होता है कि जायसवाल परिवार द्वारा कंपनी का नियंत्रण लेने से पहले ही डेटासेल एस्टोनियाई रक्षा निवेश केंद्र (आरकेआईके) के संपर्क में थी.
आरकेआईके एस्टोनिया सरकार की वह एजेंसी है जो हथियार, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरण खरीदती है. इस मामले में गोला-बारूद रूस के खिलाफ युद्ध में कीव (यूक्रेन) का समर्थन करने के एस्टोनिया के प्रयास के तहत यूक्रेन के लिए खरीदा जा रहा था.
इसका कुछ पैसा यूरोपीय शांति सुविधा के माध्यम से आया था, जो एक यूरोपीय संघ फंड है और यूरोपीय देशों को यूक्रेन के लिए सैन्य सहायता प्रदान करने में मदद करता है.
इस मामले में एक अनुत्तरित प्रश्न यह भी है: वास्तव में ये तोप के गोले कहाँ से आने वाले थे? यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि नेको ने उन्हें भारत में बनाने की योजना बनाई थी या डेटासेल का इरादा उन्हें किसी अन्य उत्पादक से खरीदकर एक बिचौलिए के रूप में एस्टोनिया को आपूर्ति करने का था.

