दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों पर दक्षिणपंथी संगठनों का हमला, भारी सुरक्षा तैनाती के बीच हिंसा

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में जिज्ञासा सिन्हा की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में 25 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद शनिवार को कनॉट प्लेस और एमसीडी सिविक सेंटर के पास दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों को धमकाया और उनके साथ मारपीट की. कई घटनाओं में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में प्रदर्शनकारियों पर हमले किए गए.

दोपहर करीब 2:30 बजे पालिका बाजार के पास 30 से अधिक लोगों के एक समूह ने खुद को बजरंग दल का सदस्य बताते हुए नारेबाजी की और पत्रकारों को धमकाया. समूह के एक व्यक्ति ने कहा, “आप सीजेपी के पक्ष में फर्जी खबरें दिखा रहे हैं. हम दिल्ली पुलिस की रक्षा करेंगे, क्योंकि वह आपके खिलाफ हथियारों का इस्तेमाल नहीं कर सकती.” पुलिस ने इन लोगों को वहां से खदेड़ा और करीब आधे घंटे बाद कुछ लोगों को हिरासत में लिया.

कनॉट प्लेस में भी हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकारों के सामने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की घटनाएं हुईं. वहीं, एमसीडी सिविक सेंटर के पास हिंदुस्तान रक्षा दल से जुड़े लोगों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हिंसक हो गया. आरोप है कि इन लोगों ने सड़क पर महिलाओं और पुरुषों को घसीटा, पीटा और धमकाया.

सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में एक युवती को दो लोगों द्वारा घसीटकर पीटते हुए देखा गया. उसकी बहन ने बीच-बचाव कर उसे हमलावरों से छुड़ाया. वीडियो में युवती कहती सुनाई देती है, “कोई मुझे बचाने नहीं आया. दिल्ली पुलिस ने सब कुछ देखा.” हिंदुस्तान टाइम्स ने स्पष्ट किया कि वह इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने युवती को बचाया, उसकी मदद की और हमलावरों को वहां से हटाया. हालांकि, खबर प्रकाशित होने तक आरोपियों के खिलाफ कोई प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं हुई थी. हिंदुस्तान टाइम्स ने बजरंग दल, दिल्ली पुलिस के कई प्रवक्ताओं और नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

कनॉट प्लेस के पास बनाए गए एक अन्य वीडियो में कुछ लोग कथित तौर पर पीतल के पंच से एक प्रदर्शनकारी पर हमला करते और उसकी टी-शर्ट फाड़ते दिखाई दिए.

शाहदरा के 21 वर्षीय मीडिया छात्र ने, जिसने सुरक्षा कारणों से अपना नाम उजागर नहीं किया, बताया कि वह और उसके दो दोस्त पुलिस तथा दक्षिणपंथी समूहों के लोगों के हमलों का सामना कर रहे थे. उसने कहा कि ये लोग पिछली रात से तीन बार प्रदर्शन स्थल में घुसे, लेकिन पुलिस ने उन्हें नहीं रोका. छात्र के मुताबिक, उसके एक दोस्त के सिर पर हमला किया गया, जबकि वीडियो बना रहे छात्रों को भी पीटने की धमकी दी गई और गालियां दी गईं. डर के कारण वे वहां से चले गए.

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