एक माह में दूसरी बार यूएन विशेषज्ञों का भारत से निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग रोकने का आग्रह
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के विशेषज्ञों ने एक महीने में दूसरी बार मंगलवार (20 अक्टूबर, 2026) को भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करने और "इन तथा पिछले विरोध प्रदर्शनों के दौरान रिपोर्ट किए गए मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए न्याय सुनिश्चित करने" का आह्वान किया.
‘द हिंदू’ ब्यूरो के अनुसार, इससे पहले अक्टूबर में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान "बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने" की रिपोर्टों पर चिंता व्यक्त की थी, जिसे सरकार ने खारिज कर दिया था.
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने एक बयान में कहा कि "यह कार्रवाई एक व्यापक और चिंताजनक पैटर्न को दर्शाती है," और आगे कहा कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों को "शांतिपूर्ण सभा पर अनुचित प्रतिबंधों, बल के अत्यधिक उपयोग, मनमानी हिरासत, जबरन गायब करने, और छात्र कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने" जैसी घटनाओं के प्रति आगाह किया है.
जुलाई में नीट पेपर लीक के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन और वामपंथी समूहों तथा सीजेपी के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ चल रहे मौजूदा आंदोलन का हवाला देते हुए, विशेषज्ञों ने कहा, "प्रदर्शनों की अहिंसक प्रकृति के बावजूद, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने निहत्थे छात्रों के खिलाफ लाठीचार्ज सहित बल प्रयोग किया है और हजारों लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोका है."
बयान में सीईसी-विरोधी विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों, वकीलों और राजनीतिक दलों के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने की ओर भी इशारा किया गया और उनके उपकरणों (डिवाइस) से "विरोध से संबंधित सामग्री" हटाए जाने की आलोचना की गई.
राष्ट्रीय राजधानी में 10, 11 और 12 अक्टूबर को पुलिस द्वारा हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें पत्रकार, युवा संगठनों के सदस्य और नाबालिग शामिल थे.
दिल्ली में 12 अक्टूबर को सीईसी-विरोधी प्रदर्शन के दौरान, 'रिवोल्यूशनरी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया' के एक सदस्य विशाल, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था, ने 'द हिंदू' को बताया, "हमें जेल जैसी दिखने वाली वैन में डाला गया, पीटा गया और एक डिटेंशन सेंटर ले जाया गया. महिला प्रदर्शनकारियों को गाली दी गई और पुलिस ने उनकी गर्दन पकड़ ली."
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भारत सरकार से "अत्यधिक बल प्रयोग को रोकने, व्यापक सभा प्रतिबंधों (धारा 144 आदि) को रद्द करने और बायोमेट्रिक्स तथा इंटरनेट निलंबन सहित डिजिटल निगरानी के दुरुपयोग से बचने" की अपील की.
पिछले हफ्ते, भारत ने संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ की रिपोर्ट को "अपुष्ट बातें" कहकर खारिज कर दिया था. नई दिल्ली ने विशेषज्ञ से कहा था कि वे अप्रमाणित दावों का उपयोग करके मामलों को बदनाम करने से पहले उनकी "सत्यता की जांच" करें.

