श्रवण गर्ग | असली आंदोलन अब शुरू हुआ है

‘हरकारा डीप लाइव’ पर निधीश त्यागी के साथ बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक टिप्पणीकार श्रवण गर्ग ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि उसके अगले और ज्यादा महत्वपूर्ण चरण की शुरुआत बताया. उन्होंने कहा कि इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आंदोलनकारी जंतर-मंतर खाली कर देंगे या जवाबदेही की मांग को आगे बढ़ाएंगे.

श्रवण गर्ग ने इस्तीफे के तरीके पर ध्यान दिलाते हुए कहा, “प्रधानमंत्री ने निकाला नहीं है. उन्होंने दिया है.” उनके मुताबिक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार के सामने खड़े व्यापक सवालों को खत्म नहीं करता. उन्होंने कहा, “प्रधान साहब बलि का बकरा बने हैं.” गर्ग के अनुसार धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे विवाद में केवल एक प्रतीक हैं, जबकि छात्रों का असंतोष शिक्षा व्यवस्था और उसकी जवाबदेही को लेकर कहीं व्यापक है.

गर्ग ने कहा कि अब आंदोलन की असली परीक्षा शुरू होगी. सरकार कह सकती है कि आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें पूरी कर दी गई हैं और अब जंतर-मंतर खाली किया जाना चाहिए. लेकिन आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही और प्रधानमंत्री से माफी जैसी मांगें भी सामने आई हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या छात्र केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से संतुष्ट होंगे.

उन्होंने जंतर-मंतर और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग, सुरक्षा बलों की तैनाती और मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने की बात कही. गर्ग ने सवाल उठाया कि यदि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर खाली करने से इनकार करते हैं तो क्या सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव का नया दौर शुरू होगा.

श्रवण गर्ग के मुताबिक आंदोलन को केवल दिल्ली तक सीमित करके देखना भी गलत होगा. उन्होंने बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और उत्तराखंड में युवाओं के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, “यह पूरे देश में फैल चुका है.” उनके मुताबिक जंतर-मंतर खाली कराया जा सकता है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद असंतोष को कैसे खत्म किया जाएगा, यह सरकार के सामने बड़ा सवाल है.

गर्ग ने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान करीब एक साल तक आंदोलन करते रहे, जबकि मौजूदा छात्र आंदोलन ने अपेक्षाकृत कम समय में सरकार पर दबाव बनाया है. उन्होंने कहा, “ये जंतर-मंतर नहीं है, ये जो आक्रोश सरकार के खिलाफ है.” पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं.

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