राम मंदिर चढ़ावा विवाद: राजनीतिक हंगामा तेज होने के साथ एसआईटी ने शुरू की जांच
अयोध्या में राम मंदिर में दान (चढ़ावा) और बहुमूल्य वस्तुओं के हेरफेर के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी जांच शुरू कर दी है. विपक्षी दलों, धार्मिक नेताओं और मंदिर के संतों द्वारा गहन जांच की मांग के बाद यह विवाद एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो गया है.
मौलश्री सेठ की रिपोर्ट के अनुसार, अयोध्या में बोलते हुए, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि जांच में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी.
उन्होंने आगे कहा, "राज्य सरकार ने जिस गति से निर्णय लिया है वह सराहनीय है... एसआईटी टीम ने आज मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए मुख्यमंत्री के साथ बैठक का अनुरोध किया था. उसके तुरंत बाद, वे यहाँ आए और अपना काम शुरू कर दिया. एसआईटी जो भी सहयोग चाहेगी, जिला प्रशासन वह प्रदान करेगा. मैंने कल जिला प्रशासन से बात की थी और उन्होंने भी पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है."
बता दें कि राम मंदिर में चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य वस्तुओं के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद सरकार द्वारा एसआईटी का गठन किया गया था. अधिकारियों ने अभी तक किसी भी निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया है और जांच अभी प्रारंभिक चरण में है. अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में एफआईआर भी है हुई है.
इसका नेतृत्व लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, जिसमें पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त विभाग) नील रतन सदस्य के रूप में शामिल हैं. अधिकारियों ने कहा कि समिति को सात दिनों में एक प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर एक अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
विपक्ष का हमला जारी
इस बीच समाजवादी पार्टी ने भाजपा और मंदिर प्रबंधन पर लगातार हमला जारी रखा है, वह सोशल मीडिया पर दैनिक बयान पोस्ट कर रही है और बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगा रही है. ऐसे ही एक पोस्ट में, पार्टी ने आरोप लगाया कि मंदिर को दान में दिए गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को कथित तौर पर नकली वस्तुओं से बदल दिया गया है और करोड़ों रुपये की कथित चोरी हुई है.
कांग्रेस नेता भी इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग में शामिल हो गए हैं. उत्तर प्रदेश युवा कांग्रेस के नेता शरद शुक्ला ने भी अयोध्या भर में पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए, जिनमें स्कंद पुराण के श्लोक लिखे थे और मंदिर के चढ़ावे के दुरुपयोग के खिलाफ चेतावनी दी गई थी. इन पोस्टरों को बाद में नगर निगम द्वारा हटा दिया गया.
इस मुद्दे पर प्रमुख धार्मिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं. शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि मंदिर प्रबंधन को धार्मिक जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए और सुझाव दिया कि मंदिरों द्वारा प्राप्त दान का उपयोग सामाजिक और धार्मिक कल्याणकारी गतिविधियों जैसे कि गौशाला, पाठशाला और गुरुकुल के लिए किया जाना चाहिए.
इससे पहले, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि आंतरिक ऑडिट में कोई महत्वपूर्ण अनियमितता नहीं पाई गई है.

