श्रवण गर्ग | ये चुनाव आयोग में मतभेद नहीं, दो लोगों का विद्रोह है

'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित उस रिपोर्ट पर चर्चा की, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के बीच कथित असहमति का जिक्र किया गया है. बातचीत का केंद्र यह सवाल रहा कि अगर चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर ही महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर मतभेद हैं, तो इसका चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है.

श्रवण गर्ग ने इस रिपोर्ट को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का मामला नहीं है. उनके मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले कई महीनों में मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं. उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि दोनों अधिकारी लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे हैं और इसके बावजूद उन्हें आयोग के फैसलों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की जरूरत महसूस हुई.

बातचीत में चुनावी डेटा के केंद्रीकरण का मुद्दा भी सामने आया. श्रवण गर्ग ने कहा कि रिपोर्ट में चुनावी रोल के डेटा को केंद्रीय स्तर पर केंद्रीकृत किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं. उनके मुताबिक, इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग और सरकार की ओर से स्पष्ट सार्वजनिक जवाब जरूरी है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आयोग के भीतर निर्णयों को लेकर गंभीर असहमति थी, तो इन आपत्तियों को किस स्तर पर सुना गया और उन पर क्या कार्रवाई हुई.

एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया भी चर्चा का अहम हिस्सा रही. श्रवण गर्ग ने इसे व्यापक लोकतांत्रिक सवाल से जोड़ते हुए कहा कि मतदाता सूची से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही जरूरी है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की संभावित भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि अब सार्वजनिक संस्थाओं से इस पूरे मामले पर स्पष्ट प्रतिक्रिया की अपेक्षा है.

बातचीत में मीडिया की भूमिका भी प्रमुखता से सामने आई. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दे पर खोजी पत्रकारिता के उदाहरण के तौर पर देखते हुए श्रवण गर्ग ने सवाल उठाया कि क्या दूसरे मीडिया संस्थान भी इसी तरह महत्वपूर्ण मुद्दों पर जांच और सवाल उठाएंगे.

अंत में चर्चा इस सवाल पर पहुंची कि चुनाव आयोग के भीतर सामने आई असहमति का आगे क्या असर होगा. श्रवण गर्ग के मुताबिक, इस मामले को केवल तीन चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही के व्यापक संदर्भ में समझना चाहिए.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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