भारत के जंगल में मिले ओरंगुटान के बच्चे, तस्करी की जांच शुरू
भारत के एक जंगल में ओरंगुटान के पांच बच्चे पाए गए हैं, जिसके बाद अधिकारियों ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या उन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया से देश में तस्करी करके लाया गया था.
‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ओरंगुटान केवल बोर्नियो और सुमात्रा के द्वीपों के मूल निवासी हैं और अपने भूरे-लाल फर (बालों) के लिए जाने जाते हैं. इन्हें प्राकृतिक आवास से हजारों किलोमीटर दूर ओडिशा राज्य के बालासोर जिले में पाया गया.
ओडिशा के पर्यावरण मंत्री राम सिंह खूंटिया ने कहा कि वन्यजीव अन्वेषक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये दुर्लभ बनमानुष भारत कैसे पहुंचे. सिंह ने कहा, "हमें संदेह है कि इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय गिरोह शामिल हो सकता है."
ओरंगुटान के अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक व्यापार पर साइट्स के तहत प्रतिबंध है—जो लुप्तप्राय वन्यजीवों के व्यापार को नियंत्रित करने वाला एक वैश्विक समझौता है. इन पांचों बच्चों को वन विभाग के अधिकारियों ने बालासोर जिले की जलेश्वर रेंज में गश्त के दौरान पाया.
अधिकारियों का मानना था कि ओरंगुटान कुछ ही दिनों से इस इलाके में थे, और अब उन्हें ओडिशा के एक प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में संगरोध (क्वारंटाइन) में रखा गया है.
वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के अनुसार, एक सदी पहले 2,30,000 से अधिक की तुलना में अब बोर्नियो और सुमात्रा में लगभग 1,04,000 ओरंगुटान ही बचे हैं. तपानुलिस ओरंगुटान, जो इनकी तीसरी प्रजाति है, को अति-संकटग्रस्त के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसके जंगलों में केवल 800 से भी कम जीवित रहने का अनुमान है.
नवंबर में, संरक्षणवादियों ने पाया कि इंडोनेशिया में आई भीषण बाढ़ के बाद तपानुली की आबादी में 7% की कमी आई थी. उत्तरी सुमात्रा प्रांत में व्यापक बाढ़ और भूस्खलन में अनुमानित 33 से 54 तपानुली ओरंगुटान मारे गए थे. पिछले शोध से पता चला है कि तपानुली ओरंगुटान की आबादी में प्रतिवर्ष 1% का नुकसान भी अंततः उनके विलुप्त होने के लिए पर्याप्त होगा.

