‘सबसे अक्षम सरकार’: नागपुर के छात्र को अबू धाबी में नीट-यूजी सेंटर मिलने पर फूटा गुस्सा
महाराष्ट्र के नागपुर के एक नीट-यूजी अभ्यर्थी को रविवार को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए अबू धाबी में परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने के बाद शनिवार को भारी आक्रोश फूट पड़ा. विपक्षी नेताओं ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में बार-बार हो रही ये गड़बड़ियां दर्शाती हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार लाखों छात्रों के मानसिक तनाव के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, "जो व्यवस्था किसी छात्र को उसके अपने शहर में केंद्र उपलब्ध नहीं करा सकती—और इसके बजाय विदेश में केंद्र आवंटित कर देती है—उसे परीक्षा आयोजित करने का कोई अधिकार नहीं है."
‘एक्स’ पर हिंदी में लिखी एक पोस्ट में राहुल ने लिखा: "नागपुर का एक छात्र महीने भर से नीट की पुनरीक्षा की तैयारी कर रहा था. परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड किया. उसका आवंटित केंद्र अबू धाबी में था. उसके पास कोई पासपोर्ट नहीं है, उसके परिवार के पास उसे विदेश भेजने के लिए पैसे नहीं हैं, और अब समय भी नहीं बचा है. वह पूरी रात रोता रहा और परीक्षा देने से इनकार कर रहा है—क्या कोई इस तनाव के स्तर की कल्पना भी कर सकता है? यह आखिर हुआ कैसे? किसी भी छात्र को परीक्षा केंद्र तक न पहुंच पाने की समस्या का सामना नहीं करना चाहिए. वास्तव में, एनटीए केवल देश के छात्रों और उनके अभिभावकों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है." उन्होंने कहा, “मैंने कोटा में भी यही कहा था: यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रह गई है. यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति का शोषण है. हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद करो. वे एक संवेदनशील, जिम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा एवं परीक्षा प्रणाली के हकदार हैं—और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें यह मिले."
आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी सरकार को "इतिहास और दुनिया की सबसे अक्षम सरकार" बताया. उन्होंने कहा, "ये लोग एक परीक्षा भी ठीक से आयोजित नहीं करा सकते."
‘टेलीग्राफ वेब डेस्क और एजेंसियों’ के अनुसार, नागपुर के छात्र अब्दुल्ला तालिब ने पाया कि नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा के लिए महाराष्ट्र के नागपुर, वर्धा और भंडारा के केंद्रों का विकल्प चुनने के बावजूद उन्हें अबू धाबी में परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया था.
उनके पिता डॉ. मोहम्मद तालिब के अनुसार, परिवार उस समय स्तब्ध रह गया जब एनटीए द्वारा जारी एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी का नाम दिखा. इसके बाद परिवार ने सुधार के लिए एजेंसी से संपर्क किया. एनटीए ने ‘एक्स’ पर कहा कि इस "शिकायत" का समाधान किया जा रहा है, जिस पर अन्य लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि यह एजेंसी की विफलता है, न कि किसी छात्र की व्यक्तिगत शिकायत.
यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक विवाद में बदल गया और विपक्षी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय परीक्षाओं के आयोजन में जारी समस्याओं के प्रमाण के रूप में पेश किया.
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक्स पर लिखा: "मोदी की बेखबर और भ्रष्ट सरकार ने नीट के प्रश्नपत्र ले जाने के लिए वायुसेना को तैनात कर दिया है, उन्होंने मूर्खतापूर्ण तरीके से टेलीग्राम को बैन कर दिया है. लेकिन महाराष्ट्र के नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी में परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया गया। यह सरकार और इसकी एजेंसियां कितनी अक्षम हैं?"
तृणमूल कांग्रेस ने भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया. पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "भाजपा के शासन में राष्ट्रीय परीक्षाएं भी अराजकता, भूलों और पूर्ण प्रशासनिक विफलता का सर्कस बन गई हैं. छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, जबकि यह संवेदनहीन शासन उनके भविष्य को एक मजाक की तरह लेता है."
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि समस्या का समाधान कर दिया गया है. सिंह ने बताया कि "उम्मीदवार को अब नागपुर में ही एक केंद्र आवंटित कर दिया गया है."
नीट-यूजी 2026 की पुनरीक्षा 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5.15 बजे तक पेन-एंड-पेपर मोड में भारत के 551 शहरों और विदेशों के 14 शहरों में 22.79 लाख से अधिक उम्मीदवारों के लिए आयोजित होनी तय है. यह दोबारा परीक्षा इसलिए आयोजित की जा रही है क्योंकि पेपर लीक के आरोपों के बीच 3 मई को हुई परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी.

