जम्मू-कश्मीर में भूमि अभियान के तहत सरकारी संपत्तियों के कब्जाधारियों को बेदखली के नोटिस
जम्मू और कश्मीर सरकार ने श्रीनगर के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी संपत्तियों के उन कब्जाधारियों को बेदखली के नोटिस जारी किए हैं, जिनकी लीज (पट्टे) की अवधि समाप्त हो चुकी है. इसे 2019 के बाद सरकारी जमीन वापस लेने के व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.
यह पहल उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रशासन द्वारा लागू किए गए 'जम्मू और कश्मीर लैंड ग्रांट रूल्स, 2022' के तहत शुरू किए गए अभियान का हिस्सा लगती है. इन नियमों के तहत प्रशासन को आवासीय उद्देश्यों के लिए मौजूदा/समाप्त पट्टों को छोड़कर, उन सभी पट्टेदारों से जमीन का कब्जा वापस लेने का अधिकार मिला है जिनकी लीज खत्म हो चुकी है. ऐसा न करने पर उन्हें बेदखल कर दिया जाएगा. मुजफ्फर रैना की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर में कई लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल का मकसद स्थानीय कब्जाधारियों को संपत्तियों से हटाकर बाहरी लोगों के लिए बोली लगाने का रास्ता साफ करना है.
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने पोलो व्यू मार्केट, अपटाउन राजबाग और करण नगर जैसे शहर के प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय केंद्रों में रहने वाले कब्जाधारियों को नोटिस भेजे हैं. सरकार ने इससे पहले पहलगाम और गुलमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों में भी बेदखली के नोटिस जारी किए थे. एक हेरिटेज कमर्शियल मार्केट, पोलो व्यू के दुकानदारों ने बताया कि 'मोही-उद-दीन ट्रस्ट' द्वारा संचालित एक प्रतिष्ठित इमारत के मालिकों को नोटिस जारी किया गया है.
नोटिस में कहा गया है कि मालिक द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज सक्षम प्राधिकारी से "किसी मौजूदा पट्टे या नवीनीकरण/विस्तार के आदेश के अस्तित्व को साबित नहीं करते हैं." बेदखली के आदेश में ट्रस्ट को 21 सितंबर या उससे पहले "परिसर को खाली करने और संपदा अधिकारी को शांतिपूर्वक कब्जा सौंपने" का निर्देश दिया गया है.
नोटिस के अनुसार, ट्रस्ट को 8 अगस्त, 2026 को एक नोटिस जारी कर "सार्वजनिक परिसर पर अपने कब्जे को वैध साबित करने वाले दस्तावेजी सबूत पेश करने" के लिए कहा गया था. मालिकों ने मूल पट्टा (जो अब समाप्त हो चुका है) तथा पट्टे के नवीनीकरण की मांग करने वाले विभिन्न अभ्यावेदन और पत्राचार जमा किए थे, लेकिन वे "मौजूदा पट्टे को साबित नहीं कर सके."
लाल चौक, करण नगर और राजबाग में भी ऐसे ही नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने किराए का भुगतान नहीं किया है.
एक नोटिस में कहा गया है कि कब्जाधारी "किराए के भुगतान में चूक और मूल पट्टे के नियमों व शर्तों (निर्धारित उद्देश्य सहित) के उल्लंघन के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण या औचित्य प्रस्तुत करने में विफल रहा."
इनमें से अधिकांश नोटिसों के अनुसार, बेदखली की कार्रवाई 21 सितंबर को की जाएगी. फरवरी में, सरकार ने विधानसभा को बताया था कि केंद्र शासित प्रदेश के पास 58,034 कनाल नजूल भूमि (लीज पर दी गई सरकारी जमीन) है, जिसमें से 5,618 कनाल वाणिज्यिक (व्यावसायिक) उद्देश्यों के लिए लीज पर दी गई थी. (20 कनाल मिलकर एक हेक्टेयर बनता है.)

