‘सिर्फ इसलिए कि वे किसी क्लिप में महिला को थप्पड़ मारते पकड़े गए हैं...उन्हें बदनाम नहीं किया जा सकता’: संदीप लांबा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को 2025 के पुलिस अत्याचारों के आरोपों वाले एक मामले को अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा की निगरानी से हटाने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. लांबा को हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान एक महिला को थप्पड़ मारते हुए एक वायरल वीडियो में देखा गया था.
‘बार एंड बेंच’ के अनुसार, न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने सवाल उठाया कि क्या केवल ऐसे वीडियो के आधार पर पुलिस अधिकारी की छवि खराब की जानी चाहिए? उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग बड़े प्रदर्शनों के दौरान की ज़मीनी वास्तविकताओं से अनजान होते हैं.
न्यायाधीश ने टिप्पणी की, "केवल इसलिए कि वे किसी वीडियो में कथित तौर पर एक महिला को थप्पड़ मारते हुए पकड़े गए हैं, हम उन्हें बदनाम नहीं कर सकते. क्या हम ज़मीनी वास्तविकताओं से वाकिफ हैं? अगर भीड़ संसद में घुस जाती और गोलीबारी शुरू हो जाती, तो कितने लोगों की मौत हो सकती थी?"
अदालत एक 68 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने दावा किया था कि पिछले साल रमज़ान के दौरान उसे ज़बरदस्ती उसके घर से हटा दिया गया था और पुलिस ने रात भर अवैध रूप से हिरासत में रखा था. याचिकाकर्ता ने व्यक्त किया कि उसकी दर्ज कराई गई शिकायत पर निष्पक्ष जांच करने की लांबा की क्षमता पर से उसका भरोसा उठ चुका है.
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान लांबा द्वारा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने की खबरें मिलीं. इस तरह के आचरण ने लांबा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसलिए, उसने अपनी शिकायत पर दर्ज मामले को किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी को स्थानांतरित करने की मांग की.

