‘मुझे गोली लगी थी, फिर भी पुलिस पीटती रही’: सीवान में पुलिस कार्रवाई की आपबीती 

‘स्क्रोल’ में प्रकाशित रोकिबुज़ ज़मान की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में 25 जुलाई को छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं. सीवान में गोली लगने से घायल 20 वर्षीय बुलेट कुमार गोंड का आरोप है कि घायल होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीटा और तत्काल इलाज उपलब्ध नहीं कराया. रिपोर्ट के मुताबिक, सीवान में उस दिन तीन युवक गोली लगने से घायल हुए थे. वहीं पटना में प्रदर्शन के दौरान 15 वर्षीय छात्र मेधांश ने भी पुलिस पर बेरहमी से पिटाई करने का आरोप लगाया है.

25 जुलाई को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा ने बिहार बंद का आह्वान किया था. यह बंद तीन दिन पहले पटना में छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बुलाया गया था. छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और यह आंदोलन व्यंग्यात्मक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी की देशव्यापी मुहिम का हिस्सा था. सीवान में सैकड़ों छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए और कई जगह पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ.

सीवान जिले के डुमरहर बुजुर्ग गांव के 20 वर्षीय बुलेट कुमार गोंड उस दिन जाति और निवास प्रमाणपत्र बनवाने जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय जा रहे थे. रास्ते में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पत्थरबाजी हो रही थी. गोंड के मुताबिक, उन्होंने दूसरे लोगों की तरह किनारे से निकलकर कार्यालय जाने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उनके पैर में गोली लग गई और वह जमीन पर गिर पड़े.

गोंड ने बताया कि गोली लगने के बाद एक दोस्त ने उन्हें संभाला और खून रोकने के लिए पैर पर कपड़ा बांधा. तभी पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और दोनों को फाइबर की लाठियों से पीटना शुरू कर दिया. गोंड के मुताबिक, “मैंने कहा, ‘सर, मुझे गोली लगी है.’ मेरे दोस्त ने भी कहा, ‘सर, इसे गोली लगी है.’ लेकिन वे नहीं रुके और लगातार पीटते रहे.”

उनका आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने घायल अवस्था में उन्हें एक पैर पर करीब 100-150 मीटर चलाकर थाने पहुंचाया. गोंड का कहना है कि वह बार-बार अस्पताल ले जाने और पानी देने की गुहार लगाते रहे, लेकिन करीब 45-50 मिनट बाद एंबुलेंस बुलाई गई. उन्हें पहले सीवान सदर अस्पताल और फिर पटना के एक निजी अस्पताल भेजा गया. अस्पताल में सर्जरी का इंतजार करते हुए गोंड ने कहा, “मैं परेशान हूं. क्या मैं फिर से चल पाऊंगा?”

रिपोर्ट में सीवान में गोली लगने से घायल 21 वर्षीय आकाश यादव की आपबीती भी दर्ज है. उत्तर प्रदेश के रहने वाले यादव अपने जन्मदिन पर मंगेतर से मिलने सीवान आए थे और केक खरीदने बाहर निकले थे. उनका आरोप है कि पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी. एक गोली उनकी गर्दन में लगी और आर-पार निकल गई. यादव ने दावा किया कि उन्होंने एक पुलिसकर्मी को प्रदर्शनकारियों की तरफ निशाना लगाकर पिस्तौल चलाते देखा था. उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वह उसे पहचान सकते हैं और उनके पास उस दिन का वीडियो भी है.

सीवान में पुलिस फायरिंग का मामला उस वक्त और गंभीर हो गया, जब जेपी चौक पर एक पुलिस कॉन्स्टेबल द्वारा एके-47 से गोली चलाने की घटना सामने आई. देशभर में इसकी आलोचना के बाद कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया. बिहार पुलिस ने सीवान में तीन युवकों के घायल होने से जुड़ी फायरिंग को लेकर तीन एफआईआर दर्ज करने की बात कही है. वहीं राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

पटना में भी पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं. बिहार पुलिस के मुताबिक, 25 जुलाई को राज्यभर में प्रदर्शन के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 339 नाबालिग थे. पटना के गांधी मैदान में प्रदर्शन में शामिल कक्षा 10 के 15 वर्षीय छात्र मेधांश ने आरोप लगाया कि करीब 13-14 पुलिसकर्मियों ने उन्हें लाठियों और लकड़ी के टुकड़ों से पीटा. इस दौरान उनके हाथ-पैर और एक आंख के पास चोटें आईं.

मेधांश ने सवाल किया कि किशोरों और बच्चों को हिरासत में लेने के बजाय इस तरह लाठी से पीटना कैसे उचित हो सकता है. दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुणी पूर्वा ने भी पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और छात्र कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज करने का आरोप लगाया. उनके मुताबिक, पटना में गिरफ्तारियां अधिक हुईं, जबकि सीवान, भागलपुर और जहानाबाद जैसे जिलों में पुलिस कार्रवाई ज्यादा हिंसक रही.

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