'आसमान नहीं टूट पड़ेगा': राम मंदिर याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और सार्वजनिक दान में कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग करने वाली जनहित याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई नियमित प्रक्रिया के तहत अदालत के पूर्ण रूप से खुलने के बाद की जाएगी. टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा, "आसमान नहीं टूट पड़ेगा."

अवकाशकालीन पीठ के न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू के समक्ष याचिकाकर्ताओं ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की. इस पर न्यायमूर्ति सुंदरेश ने पूछा कि इतनी तत्काल सुनवाई की आवश्यकता क्या है. याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार जिस तरह मामले को संभाल रही है, उससे संदेह पैदा हो रहा है. हालांकि पीठ ने कहा कि अदालत खुलने के बाद जुलाई के दूसरे सप्ताह में मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा.

याचिका दो वकीलों की ओर से दायर की गई है, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले सार्वजनिक चढ़ावे और दान में धन के दुरुपयोग, गबन और हेराफेरी के आरोप हैं.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) इस मामले की जांच कर रहा है, लेकिन उसके पास जटिल वित्तीय जांच के लिए आवश्यक फोरेंसिक और तकनीकी संसाधन नहीं हैं. साथ ही, आरोप है कि एसआईटी ने बिना एफआईआर दर्ज किए ही जांच शुरू कर दी.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने यह आशंका भी जताई कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ हो सकती है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी.

याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक दान से जुड़े धन के प्रबंधन में कथित अपारदर्शिता करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को प्रभावित करती है. इसलिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध सीबीआई जांच कराकर धन के प्रवाह, जिम्मेदार लोगों और संभावित साक्ष्यों की जांच कराई जानी चाहिए.

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