सुरभि गुप्ता | एलन मस्क को मोदी और अंबानी के खिलाफ देखकर अपना हीरो बनाने से पहले सतर्क रहना चाहिए

‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने न्यूयॉर्क स्थित न्यू लाइंस मैगजीन की दक्षिण एशिया संपादक सुरभि गुप्ता के साथ एलन मस्क, रिलायंस प्रमुख मुकेश अंबानी और भारत सरकार के बीच उभरे विवाद पर चर्चा की. बातचीत में यह सवाल प्रमुखता से उठा कि मस्क की टिप्पणियां केवल भारत में अपने कारोबार के विस्तार से जुड़ी हैं या इनके पीछे भारत-अमेरिका संबंधों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत भी छिपे हैं.

एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक को भारत में प्रवेश करने से रोक रहे हैं. उन्होंने मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए सवाल किया कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं. इसके अगले दिन उन्होंने ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ लिखकर भी तंज कसा. भारत सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया. इस घटनाक्रम ने कारोबारी प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक रसूख और सरकारी फैसलों पर बड़े उद्योगपतियों के प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है.

सुरभि गुप्ता के मुताबिक, मस्क का दूसरे देशों की राजनीति में हस्तक्षेप करना कोई नई बात नहीं है. वह अलग-अलग देशों के राजनीतिक विवादों पर अपनी राय रखते रहे हैं और कई मौकों पर दक्षिणपंथी तथा राष्ट्रवादी आंदोलनों का समर्थन करते दिखाई दिए हैं. भारत के संदर्भ में यह घटनाक्रम इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मस्क के बीच पहले सार्वजनिक रूप से नजदीकी दिखाई दी थी. अब मस्क की टिप्पणियां दोनों के संबंधों में संभावित बदलाव का संकेत देती हैं. हालांकि, इसे उनके रिश्तों में निर्णायक टूट के रूप में देखना जल्दबाजी होगी.

बातचीत में स्टारलिंक की कारोबारी संभावनाओं और भारत में उसके सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा हुई. यह सेवा सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है. इससे उन दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सकती है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है. हालांकि, भारत में इसकी सफलता सेवा की कीमत, नियामकीय मंजूरी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवालों पर निर्भर करेगी. गुप्ता ने कहा कि भारत में कारोबार करना आसान नहीं है. टेस्ला की बिक्री का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय बाजार में प्रवेश कर लेना भर किसी कंपनी की सफलता की गारंटी नहीं है.

मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबंधों पर चर्चा करते हुए गुप्ता ने बताया कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मस्क ने ट्रंप का समर्थन किया था और उनके चुनाव अभियान के लिए बड़ी राशि खर्च की थी. बाद में सरकारी खर्च और कर संबंधी विधेयक को लेकर दोनों के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आए. हालांकि, समय के साथ उनके संबंधों में कुछ सुधार भी दिखाई दिया. गुप्ता के अनुसार, मस्क की भारत संबंधी टिप्पणियों को अमेरिका की घरेलू राजनीति और भारत-अमेरिका संबंधों से पूरी तरह अलग करके नहीं देखा जा सकता.

बातचीत में अमेरिकी टैरिफ, वीजा नीतियों और भारतीय आईटी कंपनियों पर उनके संभावित प्रभावों का भी उल्लेख हुआ. गुप्ता ने आगाह किया कि मस्क को केवल इसलिए भरोसेमंद नहीं मान लेना चाहिए कि वह भारत सरकार या बड़े उद्योगपतियों की आलोचना कर रहे हैं. उनकी अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं. दूसरी ओर, भारत सरकार के सामने राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा पर नियंत्रण और देश की संप्रभुता से जुड़े सवाल भी हैं.

अंत में चर्चा इस सवाल पर केंद्रित रही कि भारत में मस्क की दिलचस्पी मुख्य रूप से बड़े बाजार तक पहुंच बनाने की है या यह घटनाक्रम व्यापक राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का हिस्सा है. फिलहाल, इसके दूरगामी परिणाम स्पष्ट नहीं हैं. स्टारलिंक को लेकर आगे होने वाले फैसले और मस्क की अगली प्रतिक्रियाएं ही इस विवाद की दिशा को और स्पष्ट करेंगी.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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