तृणमूल में बड़ी फूट, निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने
जैसी कि आशंका थी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी ) में भी फूट हो गई है. टीएमसी के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को बुधवार (3 जून, 2026) को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया. विपक्ष के नेता के कक्ष की चाबियाँ सौंपे जाने के बाद, बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया. पिछले माह तृणमूल के 80 उम्मीदवार विधानसभा के लिए चुने गए थे.
‘द हिंदू’ में शिव सहाय सिंह के अनुसार, एक संवाददाता सम्मेलन में ऋतबृत ने कहा, "हमने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को 58 विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र सौंपा है. फिलहाल यह संख्या 58 है, लेकिन यह बढ़ सकती है." उन्होंने आगे कहा, "हम 18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में एक जिम्मेदार विपक्ष के रूप में काम करेंगे. हम सरकार की आलोचना करेंगे, लेकिन केवल विरोध के लिए विरोध नहीं होगा."
बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी से कहा, "हम ममता बनर्जी से अपील करते हैं कि वे तृणमूल विधायक दल की मुख्य सलाहकार बनी रहें. यदि वह हमारे साथ हैं, तो हम बेहतर ढंग से काम कर पाएंगे."
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी का "18वीं पश्चिम बंगाल विधानसभा के तृणमूल विधायकों के प्रतिनिधियों से कोई संबंध नहीं है."
सुवेंदु अधिकारी की बैठक में शामिल हुए तृणमूल विधायक
इससे पहले बुधवार को, तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 विधायकों ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में पश्चिम बंगाल राज्य सचिवालय में आयोजित एक प्रशासनिक बैठक में भाग लिया. इस बैठक में कोलकाता और उसके आसपास के तीन जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), पुलिस अधीक्षक और भाजपा विधायक शामिल हुए.
बैठक में शामिल होने वाले तृणमूल विधायकों में फिरहाद हकीम, जावेद खान और कुणाल घोष जैसे प्रमुख नाम शामिल थे.
इसके पहले तृणमूल ने सोमवार (1 जून, 2026) को दो विधायकों – बनर्जी और संदीपन साहा – को निष्कासित कर दिया था. इन दोनों ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित करने वाले प्रस्ताव पर पार्टी द्वारा उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे.
सोमवार को ही, तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कोलकाता के एस्प्लेनेड में एक विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन इसे कोई खास प्रतिक्रिया नहीं मिली क्योंकि पार्टी के अधिकांश निर्वाचित विधायक इसमें अनुपस्थित रहे. सिर्फ 6 विधायक और तीन सांसद पहुंचे थे.

