मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने व्यापक जनहित में मस्जिद के आंशिक विध्वंस को सही ठहराया
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उज्जैन में स्थानीय नगर निगम द्वारा मस्जिद के एक हिस्से को ढहाए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा है कि यह कार्य व्यापक जनहित में किया गया था. न्यायमूर्ति संजीव एन भट्ट ने माना कि मस्जिद के एक हिस्से को गिराने का यह कदम उज्जैन नगर निगम द्वारा कानून के अनुसार और व्यापक जनहित में उठाया गया था. नगर निकाय ने 2028 के उज्जैन कुंभ को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण परियोजना को सुगम बनाने के लिए मस्जिद के एक हिस्से को ध्वस्त किया है.
‘डेक्कन क्रॉनिकल’ के अनुसार, अदालत ने नगर निगम की कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज करते हुए देखा कि मस्जिद के आंशिक विध्वंस का निर्णय लेकर नगर निकाय ने कोई मनमाना रवैया नहीं अपनाया है. यह मस्जिद एक वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत है. याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह ढांचा एक प्राचीन धार्मिक स्थल था जो पीढ़ियों से अस्तित्व में था और इसके आंशिक विध्वंस से संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा.
हालांकि, अदालत ने कहा कि निगम और राज्य की इस कार्रवाई को 'मनमाना, अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक या भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300A का उल्लंघन' नहीं माना जा सकता है. अदालत ने सड़क चौड़ीकरण के उद्देश्य से उसी सड़क पर दस मंदिरों और एक अन्य मस्जिद के हिस्सों को ध्वस्त किए जाने का हवाला दिया और आगे कहा कि अधिकारियों ने 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्माणों के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की है.

