अनंत अंबानी की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में नियुक्ति पर संरक्षणवादियों का विरोध

‘द गार्जियन’ में रेचल हॉल और पैट्रिक ग्रीनफील्ड ने लिखा है कि न्यूकैसल विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय तेल और गैस कारोबारी परिवार के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी को स्थिरता के क्षेत्र में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ नियुक्त किए जाने के बाद संरक्षणवादियों, पर्यावरणविदों और विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं.

विश्वविद्यालय ने कहा कि यह नियुक्ति अंबानी के संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा, पशु कल्याण और पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में काम तथा “अधिक टिकाऊ भविष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान” को मान्यता देती है.

31 वर्षीय अनंत अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी के बेटे हैं. मुकेश अंबानी की संपत्ति का बड़ा हिस्सा तेल और गैस कारोबार से जुड़ा है. उनके समूह के पास गुजरात में दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक है. अनंत अंबानी रिलायंस समूह के कार्यकारी बोर्ड में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े काम देखते हैं. उनकी अनुमानित संपत्ति करीब 90 अरब पाउंड बताई गई है.

वंतारा और वन्यजीव संरक्षण का दावा

अनंत अंबानी ने गुजरात में परिवार की तेल रिफाइनरी के पास 1,400 हेक्टेयर में फैला निजी वन्यजीव केंद्र और चिड़ियाघर ‘वंतारा’ स्थापित किया है. रिपोर्ट के अनुसार, यहां 1.5 लाख से अधिक जानवर हैं, जिनमें करीब 200 शेर, 250 तेंदुए और 900 मगरमच्छ शामिल हैं. 2024 में अंबानी के विवाह से पहले के भव्य समारोह भी वंतारा में आयोजित किए गए थे, जिनमें कई चर्चित हस्तियां और राजनेता शामिल हुए थे.

संरक्षण संगठनों ने पहले यह सवाल उठाया है कि वंतारा में कुछ जानवर किस स्रोत से लाए गए, क्योंकि इनमें कई संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं. हालांकि, वंतारा को किसी गलत काम के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है.

अप्रैल में अनंत अंबानी ने ‘वंतारा विश्वविद्यालय’ भी शुरू किया था, जिसे वन्यजीव संरक्षण और पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए दुनिया का पहला वैश्विक विश्वविद्यालय बताया गया.

वन्यजीव आयात पर उठे सवाल

2025 में जर्मन अखबार ‘ज्यूडडॉइचे साइटुंग’ की जांच में दावा किया गया कि वंतारा पहुंचने वाले कई जानवर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के रास्ते आए, जहां वन्यजीव व्यापार के नेटवर्क को लेकर पारदर्शिता संबंधी चिंताएं रही हैं. इससे संकटग्रस्त प्रजातियों की संभावित अवैध तस्करी को लेकर सवाल उठे.

अगस्त 2025 में भारत के उच्चतम न्यायालय की जांच, जो तीन सप्ताह से भी कम समय चली, ने वंतारा के संचालकों को किसी गलत काम का दोषी नहीं पाया. इसके बाद संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करने वाली संयुक्त राष्ट्र संस्था सीआईटीईएस के तथ्य-जांच मिशन ने पाया कि वंतारा में जानवर लाने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ परमिट संभवतः जाली थे.

सीआईटीईएस ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में जानवरों के आयात से अनजाने में अवैध स्रोतों से जानवरों की मांग पैदा हो सकती है. संस्था ने भारत द्वारा संकटग्रस्त वन्यजीवों के आयात पर प्रतिबंधों की सिफारिश की थी. हालांकि, भारत, अमेरिका और जापान की आपत्तियों के बाद उसने यह फैसला वापस ले लिया.

अगस्त 2026 में वंतारा ने अपने संचालन में बदलाव की घोषणा की. इसके तहत सीआईटीईएस के पूर्व प्रमुख को संचालन की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई और अगले वर्ष जून तक वन्यजीवों के सभी आयात स्वेच्छा से रोकने की घोषणा की गई.

विश्वविद्यालय की नियुक्ति पर सवाल

भारतीय पर्यावरणविद् और लेखक रामचंद्र गुहा ने नियुक्ति को “रहस्यमय” बताते हुए कहा कि भारत और दुनिया में पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इस सम्मान के लिए अधिक योग्य हो सकते थे. उन्होंने सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय ने नियुक्ति से पहले किस तरह की जांच-पड़ताल की.

न्यूकैसल विश्वविद्यालय में यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज यूनियन के शाखा अध्यक्ष मैट पेरी ने कहा कि कर्मचारियों ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं के आधार पर नियुक्ति पर आपत्ति जताई है.

ससेक्स विश्वविद्यालय की प्रोफेसर लैला मेहता ने भी चिंता जताई कि सार्वजनिक धन में कमी के बीच अरबपतियों और कॉरपोरेट धन का अकादमिक संस्थानों की दिशा पर प्रभाव बढ़ सकता है. उनके अनुसार, विश्वविद्यालयों को सत्ता और कंपनियों से सवाल करना चाहिए, न कि उन्हें अकादमिक वैधता प्रदान करनी चाहिए.

‘ऑयल चेंज इंटरनेशनल’ के शोध सह-निदेशक लोर्न स्टॉकमैन ने कहा कि जलवायु संकट के दौर में तेल और गैस से तेजी से बाहर निकलने की जरूरत है और सार्वजनिक धन से चलने वाले संस्थानों को इस दिशा में बेहतर मानक अपनाने चाहिए.

अंबानी परिवार और वंतारा का पक्ष

अंबानी परिवार और वंतारा ने पहले वन्यजीव तस्करी से जुड़े आरोपों को खारिज किया है. उनका कहना है कि वंतारा का उद्देश्य जानवरों का बचाव, पुनर्वास और देखभाल करना है.

न्यूकैसल विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की यह भूमिका अंबानी के वंतारा के माध्यम से संरक्षण, जैव विविधता, पशु कल्याण और पर्यावरणीय प्रबंधन में योगदान तथा रिलायंस समूह को हरित ऊर्जा की ओर ले जाने में उनकी भूमिका को मान्यता देती है.

Previous
Previous

मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी

Next
Next

बंगाल फिर सुर्खियों में: मुस्लिम व्यक्ति और तीन बेटों को घर से उठाया गया, पुलिस का कहना है कि उन्हें ‘निर्वासित’ कर दिया गया