पॉक्सो विवाद पर आरएसएस ने भाजपा से बनाई दूरी, कहा - “उनका आंतरिक मामला”

तेलंगाना में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई बागीरथ पर दर्ज पॉक्सो मामले को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से खुद को भाजपा से अलग कर लिया है.

‘साउथ फर्स्ट’ के मुताबिक, गुरुवार 22 मई को आरएसएस की तेलंगाना इकाई ने बयान जारी करते हुए कहा कि कुछ मीडिया संस्थान “झूठा प्रचार” कर संघ और उसके पदाधिकारियों को विवाद में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं.  संघ ने साफ कहा कि यह “भाजपा का आंतरिक मामला” है और पार्टी के संगठनात्मक मामलों में आरएसएस की “कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं” है.

आरएसएस तेलंगाना प्रांत संघचालक बी. सुंदर रेड्डी ने बयान जारी कर कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों के जरिए संघ के पदाधिकारियों की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि “आधारहीन और दुर्भावनापूर्ण” खबरों के जरिए संघ को बदनाम किया जा रहा है.

संघ ने चेतावनी दी कि यदि संगठन और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ इस तरह का “दुष्प्रचार” जारी रहा तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. बयान में कहा गया कि आरएसएस कार्यकर्ता समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों में लगे हुए हैं और उन्हें राजनीतिक विवादों में घसीटना अनुचित है.

दरअसल, बंदी साई बागीरथ को पिछले सप्ताह पॉक्सो मामले में गिरफ्तार किया गया था. इससे पहले तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया.

हालांकि केंद्रीय मंत्री बंदी संजय लगातार दावा कर रहे हैं कि उनके बेटे ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया और पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है. दूसरी तरफ पुलिस और मुख्यमंत्री  रेवंत रेड्डी का कहना है कि आरोपी को नाकाबंदी अभियान के दौरान पकड़ा गया.

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह भी कहा कि मामले में गिरफ्तारी में देरी या प्रक्रिया में लापरवाही के आरोप निराधार हैं.

इस मामले ने तेलंगाना की राजनीति को और गर्म कर दिया है. विपक्षी बीआरएस, सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. अब आरएसएस  के सार्वजनिक तौर पर दूरी बनाने के बाद भाजपा पर राजनीतिक दबाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है.

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