पॉक्सो विवाद पर आरएसएस ने भाजपा से बनाई दूरी, कहा - “उनका आंतरिक मामला”
तेलंगाना में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई बागीरथ से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में नया राजनीतिक मोड़ आ गया है. 'साउथ फर्स्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पहली बार सार्वजनिक बयान जारी कर इस पूरे विवाद से खुद को अलग कर लिया है और इसे भाजपा का आंतरिक मामला बताया है. जानिए सीएम रेवंत रेड्डी और संघचालक बी. सुंदर रेड्डी का पूरा रुख.
भारत में अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच आरएसएस क्यों कर रहा है पश्चिम में लॉबिंग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी वैश्विक छवि को मजबूत करने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के आरोपों को खारिज करने के लिए अमेरिका, यूके और जर्मनी के दौरों का आयोजन कर रहा है. 'अल जजीरा' की इस विस्तृत रिपोर्ट में आरएसएस की वैचारिक पृष्ठभूमि, हेट स्पीच के आंकड़े और 'एसआईआर' विवाद का विश्लेषण किया गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट
श्रवण गर्ग | अगर होसबोले जैसा नेता पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने की बात कर रहा है, तो इसे केवल निजी राय नहीं माना जा सकता
हरकारा डीप डाइव के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के हालिया बयान, भारत-पाकिस्तान संबंधों, संघ की राजनीति, विदेश नीति और भारतीय मुसलमानों की स्थिति पर गंभीर चर्चा की.
अल्पसंख्यकों के मामले में अपनी ‘छवि’ सुधारने के लिए आरएसएस विदेशों में सक्रिय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी की जननी माने जाने वाले शक्तिशाली हिंदू संगठन आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) ने मंगलवार को कहा कि उसने अपनी छवि सुधारने के लिए अमेरिका सहित अन्य देशों के विदेशी दौरों का आयोजन किया है. संगठन का उद्देश्य उन धारणाओं का खंडन करना है, जिनमें उसे एक अर्धसैनिक संगठन और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों में शामिल बताया जाता है.
अरुण कुमार: ऐन चुनाव के वक़्त बंगाल में आरएसएस का हरकत में आना
आरएसएस नेतृत्व महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को संभालने के तरीके को लेकर मोदी और शाह से नाराज़ है. उन्होंने यह उम्मीद नहीं की थी कि एक सावधानीपूर्वक नियोजित रणनीति को इस जोड़ी द्वारा बिगाड़ दिया जाएगा. बंगाल में मोदी द्वारा लगभग पूरे भाजपा नेतृत्व और मंत्री सहयोगियों की तैनाती का उल्टा असर हुआ है, क्योंकि कई बंगाली उनके प्रचार के अंदाज़ को बंगाली संस्कृति और सामाजिक मानदंडों को नज़रअंदाज़ करने वाला मान रहे हैं. परिसीमन विधेयक का उपयोग उस तरह से नहीं किया गया जैसा कि आरएसएस ने मूल रूप से सोचा था.

