सबसे ज़्यादा कौन ‘पीता’ है? अरुणाचल राष्ट्रीय तालिका में शीर्ष पर, हिमाचल उत्तर भारत में आगे
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) (2023–24) से पता चला है कि देश में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में शराब का सेवन करने वालों का सबसे अधिक अनुपात अरुणाचल प्रदेश में है, जो 50.5 प्रतिशत है. हालांकि, यह आंकड़ा एनएफएचएस-5 (2019-21) में दर्ज 52.6 प्रतिशत से कम हुआ है. 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में भी अरुणाचल प्रदेश इस तालिका में शीर्ष पर है, जहाँ 2023-24 में 23.2 प्रतिशत महिलाओं ने शराब का सेवन करने की बात कही है, जो 2019-21 में 24.2 प्रतिशत थी.
भारतेश सिंह ठाकुर की रिपोर्ट है कि पुरुषों में तेलंगाना दूसरे स्थान पर है, जहाँ 43.9 प्रतिशत पुरुषों ने शराब का सेवन करने की बात स्वीकार की है, जो पिछले मूल्यांकन के 43.4 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है. इसके बाद सिक्किम का स्थान है, जहाँ 42.2 प्रतिशत पुरुषों ने शराब पीने की बात मानी है, जो 2019-21 में 39.9 प्रतिशत थी. महिलाओं में सिक्किम देश में दूसरे स्थान पर है, जहाँ पिछले सर्वेक्षण के 16.2 प्रतिशत के मुकाबले इस बार 19.9 प्रतिशत महिलाओं ने शराब के सेवन की बात कही है. सभी प्रकार के तंबाकू के सेवन के मामले में, मिजोरम पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए तालिका में सबसे ऊपर है, जहाँ क्रमशः 73.6 प्रतिशत और 61 प्रतिशत लोगों ने इसके सेवन की बात कही है.
शराब के सेवन में हिमाचल उत्तर भारत में शीर्ष पर
हिमाचल प्रदेश में, 2023-24 में 30.2 प्रतिशत पुरुषों ने शराब पीने की बात कही, जो उत्तर भारत में सबसे अधिक अनुपात है. हालांकि, यह आंकड़ा पिछले एनएफएचएस मूल्यांकन में दर्ज 31.9 प्रतिशत से कम हुआ है. उत्तराखंड में 27.2 प्रतिशत पुरुषों ने शराब के सेवन की बात कही, जबकि 2019-21 में यह आंकड़ा 25.5 प्रतिशत था. पड़ोसी राज्यों पंजाब और हरियाणा में क्रमशः 22.9 प्रतिशत और 17.5 प्रतिशत पुरुषों द्वारा शराब पीने की बात सामने आई है. चंडीगढ़ में 21.6 प्रतिशत पुरुषों ने शराब के सेवन की बात कही, जो पिछले सर्वेक्षण के 18.6 प्रतिशत से अधिक है.
पुरुषों में शराब का सेवन दिल्ली (16.1 प्रतिशत) और जम्मू-कश्मीर (7.3 प्रतिशत) में कम था. हालांकि, लद्दाख में यह आंकड़ा 18.4 प्रतिशत रहा. राजस्थान में केवल 10.7 प्रतिशत पुरुषों ने शराब पीने की बात कही, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 18.7 प्रतिशत था.
उत्तर भारत की महिलाओं में, चंडीगढ़ में 1.1 प्रतिशत महिलाओं ने शराब पीने की बात स्वीकार की. लद्दाख में 0.8 प्रतिशत महिलाओं ने शराब के सेवन की बात कही, इसके बाद हिमाचल प्रदेश 0.6 प्रतिशत पर रहा. यही आंकड़े दिल्ली में 0.4 प्रतिशत; उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब प्रत्येक में 0.3 प्रतिशत; और हरियाणा तथा जम्मू-कश्मीर प्रत्येक में 0.2 प्रतिशत थे.
मोटापे में कहां के लोग आगे
जब बात अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त पुरुषों की आती है (वे लोग जिनका बॉडी मास इंडेक्स 25 किलोग्राम/वर्ग मीटर या उससे अधिक है), तो चंडीगढ़ देश में शीर्ष पर है. यहाँ 48.5 प्रतिशत पुरुष इस श्रेणी में आते हैं, जो पिछले एनएफएचएस मूल्यांकन के 34.4 प्रतिशत से काफी अधिक है.
चंडीगढ़ के बाद, अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त पुरुषों का सबसे अधिक अनुपात अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (46.1 प्रतिशत) और पुडुचेरी (45.9 प्रतिशत) में दर्ज किया गया. दोनों ही क्षेत्रों में पिछले सर्वेक्षण के बाद से इन आंकड़ों में वृद्धि हुई है.
महिलाओं में, पुडुचेरी में अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त लोगों का अनुपात सबसे अधिक 51.3 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो 2019-21 में 46.3 प्रतिशत था. इसके बाद लक्षद्वीप का स्थान रहा, जहाँ 50.1 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की शिकार थीं (जो एनएफएचएस-5 के 33.5 प्रतिशत से एक बड़ी वृद्धि है), और आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 36.3 प्रतिशत से बढ़कर 47.9 प्रतिशत हो गया.
प्रो. नंदा ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर भी, पिछले मूल्यांकन की तुलना में अधिक पुरुषों (27.3 प्रतिशत) और महिलाओं (30.7 प्रतिशत) ने अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होने की बात कही है. अधिकांश राज्यों में इसमें वृद्धि दर्ज की गई है.
6-23 महीने के केवल 15.3% बच्चों को ही मिल रहा पर्याप्त आहार
इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बिंदु शाजन पेराप्पदन ने बताया है कि 6-23 महीने के केवल 15.3% बच्चों को ही पर्याप्त आहार मिल रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, एनएफएचएस-6 में 6-23 महीने के आयु वर्ग के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वालों का अनुपात 15.3% रहा, जो एनएफएचएस-5 के 11% से अधिक है. इसका मतलब यह है कि भोजन की उपलब्धता और सरकारी पोषण कार्यक्रमों में सुधार के बावजूद, भारतीय बच्चों को स्वस्थ विकास और मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक विविध और नियमित भोजन अभी भी नहीं मिल पा रहा है.

