लीक, रद्द, पुनरावृत्ति: भारत की परीक्षा संकट की सूची और लंबी हुई

भारत की सरकारी परीक्षा प्रणाली पिछले कई वर्षों से गहन जांच के दायरे में है. बार-बार होने वाले पेपर-लीक घोटालों के कारण कई ऐसी प्रमुख परीक्षाओं को रद्द, स्थगित या फिर से आयोजित करना पड़ा है, जिन पर लाखों छात्र नौकरियों और उच्च शिक्षा के लिए निर्भर हैं.

विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर परीक्षाओं की शुचिता की रक्षा करने में विफल रहने का बार-बार आरोप लगाया है. यह विवाद इस साल उस समय अपने चरम पर पहुंच गया जब नीट-यूजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक मामले ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया, जिसके कारण 21 जून को इस परीक्षा को दोबारा आयोजित करना पड़ा.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में, ऐसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं के बार-बार रद्द होने से न केवल लाखों छात्रों का जीवन संकट में पड़ा है, बल्कि उम्मीदवारों पर भारी मानसिक और भावनात्मक तनाव भी बढ़ा है. चाहे वह मेडिकल परीक्षा हो या विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा, यहाँ हाल के वर्षों में कथित पेपर लीक के कारण रद्द हुई प्रमुख परीक्षाओं पर एक नजर डाली गई है.

वर्ष 2026

नीट-यूजी: नीट-यूजी का मामला प्रश्नपत्र लीक और व्यवस्थागत विफलता के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसके कारण 3 मई को हुई परीक्षा को अमान्य (रद्द) घोषित कर दिया गया और बाद में 21 जून को इसे फिर से आयोजित किया गया. एक 'गेस पेपर' (अनुमानित प्रश्नपत्र), जिसके प्रश्न मुख्य परीक्षा के प्रश्नों से मेल खा रहे थे, कई राज्यों में एक महीने से अधिक समय तक प्रसारित किया गया था. केंद्र सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे और इस स्पष्ट लीक से जुड़े 13 से अधिक लोगों को अंततः गिरफ्तार किया गया. फर्जी सूचनाओं और प्रश्नपत्रों के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र ने भारत में 22 जून तक टेलीग्राम ऐप पर भी प्रतिबंध लगा दिया था.

वर्ष 2025

विशेष ओडिशा शिक्षक पात्रता परीक्षा (ओटीईटी): वर्ष 2025 में, ओडिशा के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के बाद विशेष ओटीईटी को अचानक रद्द कर दिया था. इसकी घोषणा परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले की गई थी, जिसमें 75,000 से अधिक उम्मीदवार शामिल होने वाले थे.

रेलवे बोर्ड परीक्षा (एलडीसीई/जीडीसीई): रेलवे बोर्ड ने मार्च में ग्रुप 'सी' के लिए सभी सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षाओं (एलडीसीई) और सामान्य विभागीय प्रतियोगी परीक्षाओं (जीडीसीई) को रद्द कर दिया था.  यह फैसला सीबीआई द्वारा पेपर लीक के सिलसिले में 26 कर्मियों को गिरफ्तार करने के बाद लिया गया था.

वर्ष 2024

यूजीसी-नेट: वर्ष 2024 में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) 2024 को आयोजित होने के ठीक एक दिन बाद इस चिंता के कारण रद्द कर दिया गया था कि इसकी शुचिता से समझौता किया गया है. इस रद्दीकरण की घोषणा से 9 लाख से अधिक छात्रों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ा, और बाद में यह परीक्षा ऑनलाइन मोड में आयोजित की गई.

नीट-यूजी 2024: नीट-यूजी 2024 ने भी पेपर लीक के आरोपों के बाद देशव्यापी आक्रोश पैदा किया था. जांच से पता चला कि परीक्षा से पहले पेड व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रश्नपत्र प्रसारित किया गया था. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े लोगों सहित कई गिरफ्तारियां की गईं, जिससे एक 'संगठित नेटवर्क' का खुलासा हुआ.

नीट-पीजी और सीएसआईआर-यूजीसी नेट: अधिकारियों द्वारा इन परीक्षाओं की शुचिता से समझौता होने की आशंका जताए जाने के बाद नीट-पीजी और सीएसआईआर-यूजीसी नेट परीक्षाओं को भी आखिरी समय पर रद्द कर दिया गया था.

वर्ष 2023

बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा: धोखाधड़ी और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 को रद्द कर दिया गया था. केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) ने राज्य के कई केंद्रों पर आयोजित 1 अक्टूबर की लिखित परीक्षा को रद्द कर दिया. पूरे राज्य में सघन तलाशी अभियान चलाकर पेपर लीक के सिलसिले में 130 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

वर्ष 2022

बिहार लोक सेवा आयोग: वर्ष 2022 एक और ऐसा साल था जिसमें पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और उसके बाद परीक्षाओं के रद्द होने का सिलसिला देखा गया. बिहार लोक सेवा आयोग ने अपनी 67वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को तब रद्द कर दिया जब परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही पेपर लीक हो गया और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हो गया.बाद में इसी वर्ष सितंबर में प्रारंभिक परीक्षा दोबारा आयोजित की गई थी.

सीयूईटी-यूजी: हालांकि इसे पूरी तरह से रद्द नहीं किया गया था, लेकिन 2022 में सीयूईटी-यूजी परीक्षा को चरण 2 और चरण 4 के दौरान कई तकनीकी गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण कई केंद्रों पर इसे रद्द करना पड़ा था. 

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