भारत सरकार के पूर्व सचिव ई. ए. एस. शर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए आधार कार्ड की जगह मतदाता पहचान पत्र इस्तेमाल करने के कथित फैसले पर चिंता जताई है. उन्होंने इसे प्रथम दृष्टया आधार अधिनियम, 2016 की भावना के विपरीत बताया और कहा कि इससे लाखों लोग सामाजिक सुरक्षा तथा सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं.
शर्मा ने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का उल्लेख किया. उन्होंने आशंका जताई कि इनमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं, जिन्हें केंद्र और राज्य सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं से भी बाहर किया जा सकता है. उनके अनुसार, एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण राज्य में गंभीर मानवीय संकट पैदा हो सकता है.
उन्होंने केंद्रीय पंचायती राज मंत्री के उस कथित बयान पर भी सवाल उठाया, जिसमें लाभार्थियों के भुगतान के लिए आधार की जगह मतदाता पहचान पत्र और बायोमेट्रिक जानकारी इस्तेमाल करने की बात कही गई थी. शर्मा का तर्क है कि आधार का इस्तेमाल सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र निवासियों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है, जबकि मतदाता पहचान पत्र का उद्देश्य अलग है. उन्होंने याद दिलाया कि आधार योजना पर सरकार 18,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी है और 2018 में उच्चतम न्यायालय ने आधार अधिनियम की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था.
शर्मा ने कहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटने का अर्थ यह नहीं है कि वह भारतीय नागरिक नहीं है. एसआईआर के दौरान कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए कई लोगों की अपीलें अभी संबंधित अधिकारियों के पास लंबित हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकता की स्थिति स्पष्ट होने तक किसी व्यक्ति को केवल मतदाता पहचान पत्र न होने के आधार पर कल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.
पत्र में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रवासियों सहित सभी लोगों के बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए. उन्होंने सरकार से अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए उपलब्ध कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल करने और एसआईआर को इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल न करने की अपील की.
शर्मा ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि सरकार आधार कार्ड के माध्यम से लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन जारी रखे और नागरिकता पर अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं से वंचित न करे.

