'श्रेय दोनों पक्षों को': सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सभी एफ़आईआर रद्द कीं

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, परीक्षा पेपर लीक के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अगुवाई करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की एक बड़ी माँग मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और कुछ राज्यों के अनुरोध पर अनुच्छेद 142 की असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के ख़िलाफ़ देश भर में दर्ज एफ़आईआर रद्द कर दीं.

पीठ को बताया गया कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने भी एफ़आईआर दर्ज की हैं, पर उन्हें रद्द कराने अदालत नहीं आए. इस पर अदालत ने निर्देश दिया कि 20 से 25 जुलाई 2026 के इन्हीं प्रदर्शनों से जुड़ी जो एफ़आईआर औपचारिक रूप से उसके संज्ञान में नहीं लाई गईं, उन पर न जाँच होगी न कार्रवाई, और उन्हें हर लिहाज़ से बंद माना जाएगा. कोई भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश इन तारीख़ों के प्रदर्शनों को लेकर नई एफ़आईआर भी दर्ज नहीं करेगा.

पीठ ने कहा कि वह यह शक्ति उन नौजवानों के "भविष्य को ध्यान में रखते हुए" इस्तेमाल कर रही है जो "नेकनीयती से प्रदर्शन करने आए थे."

हालाँकि अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को उन 2,873 लोगों के ख़िलाफ़ नई एफ़आईआर दर्ज करने की छूट दे दी जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है और जो कथित तौर पर प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद थे. पुलिस ने पहले अदालत को बताया था कि इन पर हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती, बलात्कार और पॉक्सो जैसे गंभीर आरोप हैं.

अदालत में मौजूद सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने बयान पढ़ा कि सरकार के "सकारात्मक आश्वासनों और आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता" को देखते हुए पार्टी 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस ले रही है. मार्च का ऐलान इस आरोप के साथ हुआ था कि केंद्र मुक़दमे वापस लेने के वादे से मुकर रहा है.

पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष अदालत में दिए बयानों का पालन करेंगे, और यह आदेश ख़ास परिस्थितियों में दिया गया है, इसलिए इसे नज़ीर नहीं माना जाएगा.

केंद्र और राज्यों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार जुलाई में दिए गए आश्वासनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, और मुआवज़े की प्रक्रिया तय करने के लिए तीन महीने का समय माँगा. अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह राज्यों से सलाह कर अखिल भारतीय मुआवज़ा नीति बनाए और नीट 2026 पेपर लीक के बाद जिन छात्रों की जान गई, उनके परिवारों को नीति बनने के तीन महीने के भीतर मुआवज़ा दे.

सुनवाई के आख़िर में दास ने अदालत का शुक्रिया अदा करते हुए फ़ैसले को "ऐतिहासिक" कहा. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जवाब दिया, "आपने भी बहुत अच्छा रवैया दिखाया है. श्रेय दोनों पक्षों को जाता है. एक संस्था के तौर पर हम आभारी हैं कि एक बहुत रचनात्मक माहौल बना है, जो नौजवानों के काम आएगा." पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे.

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