श्रवण गर्ग | ट्रंप की हार का भारत की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर?

‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ अमेरिकी चुनाव परिणामों और उनके भारतीय राजनीति पर संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा की. बातचीत में ट्रंप की पार्टी को मिली हार, दुनिया में दक्षिणपंथी राजनीति के बदलते रुझान और भारत में भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सामने खड़ी चुनौतियों पर विस्तार से बात हुई.

श्रवण गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी चुनाव में सबसे बड़ा झटका रिपब्लिकन पार्टी को उन राज्यों में लगा, जिन्हें उसका मजबूत गढ़ माना जाता था. उनके अनुसार, सात राज्यों में राजनीतिक समीकरण बदलना इस बात का संकेत है कि मतदाताओं ने ट्रंप की नीतियों और नेतृत्व के प्रति असंतोष जताया है. उन्होंने ब्राजील, हंगरी और इजराइल के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में दक्षिणपंथी राजनीति को चुनौती मिल रही है.

गर्ग ने अमेरिकी चुनाव परिणामों को भारत के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ट्रंप की हार भाजपा और संघ के लिए अप्रत्याशित झटका है. भारत सरकार ने ट्रंप प्रशासन के साथ व्यापार, ऊर्जा और तकनीक सहित कई क्षेत्रों में समझौतों की उम्मीदें लगा रखी थीं. अब अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति के कारण भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में भारत को अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ-साथ डेमोक्रेटिक नेतृत्व से भी संवाद करना होगा.

उन्होंने कहा कि ट्रंप की हार का असर भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी पड़ सकता है. गर्ग के अनुसार, भाजपा और संघ के भीतर यह चिंता बढ़ सकती है कि मौजूदा नेतृत्व के तहत चुनाव लड़ने पर पार्टी को भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है. उन्होंने अमेरिका के पारंपरिक रिपब्लिकन राज्यों में आए बदलाव की तुलना भारत के उन राज्यों से की, जिन्हें भाजपा अपना मजबूत राजनीतिक आधार मानती है. उनके मुताबिक, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी के सामने जनसमर्थन बनाए रखने की चुनौती है.

गर्ग ने यह भी कहा कि ट्रंप की राजनीति में महंगाई, रोजगार और आम मतदाताओं की समस्याओं के बजाय व्यक्तिगत विरासत और परिवार के हितों को प्राथमिकता दी गई. उनके अनुसार, भारत में भी विपक्ष अब रोजगार, महंगाई, कानून-व्यवस्था और व्यापार समझौतों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है. राहुल गांधी के हमलों से सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है.

बातचीत के अंत में उन्होंने कहा कि अमेरिकी चुनाव परिणामों के बाद भारत में लोकतंत्र, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों से जुड़े सवालों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से चर्चा तेज हो सकती है.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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