पहले लियोनेल मेसी. अब क्रिस्टियानो रोनाल्डो. तीन महीने के भीतर, सर्वकालिक महान फुटबॉल खिलाड़ियों में से दो ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को अलविदा कह दिया है.
पी. के. अजीत कुमार के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा. यह मेसी की उस प्रतिभा, जो शून्य से भी चमत्कार रच देती है, और रोनाल्डो की ताकत, गति तथा निर्मम लालित्य के बिना पहले जैसा हो भी कैसे सकता है?
हम भाग्यशाली रहे हैं कि उनके असाधारण करियर हमारी आँखों के सामने फले-फूले, और हम पिछले दो दशकों में विश्व कप तथा यूरोपीय लीगों में उनके वे सभी अविश्वसनीय गोल देख सके.
यह सच है कि हर कोई मेसी से प्यार करना पसंद करता है. रोनाल्डो को शायद उस तरह सार्वभौमिक रूप से न सराहा जाता हो जैसे अर्जेंटीना के इस खिलाड़ी को सराहा जाता है, लेकिन उनके प्रशंसकों की दीवानगी भी किसी से कम नहीं है.
विनम्रता भले ही उनका सबसे बड़ा गुण न रहा हो, उन पर डाइविंग (फुटबॉल में गिरकर बेईमानी करने) के आरोप लगे हों, वे थोड़े नाटकीय रहे हों, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि बहुत कम खिलाड़ियों ने इस खूबसूरत खेल को इतने जुनून और इतनी भूख के साथ खेला है.
वास्तव में, जब अपनी कला और एथलेटिसिज्म (शारीरिक दक्षता) में पूर्णता की तलाश, अदम्य जुनून और अटूट लगन की बात आती है, तो आपको न केवल फुटबॉल में, बल्कि सभी खेलों में रोनाल्डो जैसा कोई दूसरा मुश्किल से ही मिलेगा. अपने देश में, वे एक खेल दिग्गज की याद दिलाते हैं.
वह व्यक्ति हैं विराट कोहली, जिन्होंने रोनाल्डो की तरह ही उम्र को मात दी है. इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारतीय सुपरस्टार इस पुर्तगाली सुपरस्टार का मुरीद है.
यदि फुटबॉल क्रिकेट की तरह टीम खेल के भीतर एक व्यक्तिगत खेल होता, तो पुर्तगाल ने और अधिक टूर्नामेंट जीते होते. एक कपिल देव जिम्बाब्वे को हरा सकते थे. एक ग्लेन मैक्सवेल अफगानिस्तान को हरा सकते थे.
फुटबॉल उतना ही टीम खेल है जितना कि कोई अन्य खेल. अभी कुछ ही दिन पहले, बोरुसिया डॉर्टमुंड के महान खिलाड़ी मार्सेल श्मेलज़र ने एक साक्षात्कार के दौरान इस संवाददाता से कहा था कि वे बैलन डी'ऑर के प्रशंसक नहीं थे, क्योंकि उनका मानना था कि फुटबॉल एक टीम खेल है, यह व्यक्तियों के बारे में नहीं है.
फिर भी, रोनाल्डो की व्यक्तिगत प्रतिभा ने पुर्तगाल को एक दुर्जय ताकत बना दिया. वे 2016 में पुर्तगाल को यूरो खिताब तक ले गए. दुखद बात यह रही कि फ्रांस के खिलाफ फाइनल में केवल 25 मिनट के बाद ही उन्हें चोट के कारण मैदान छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने बाउंड्री के बाहर से अपने साथियों का उत्साह बढ़ाया. यह पुर्तगाल का सबसे बेहतरीन पल था.
रोनाल्डो के रहते पुर्तगाल ने 2006 से 2026 के बीच हर विश्व कप में हिस्सा लिया (उनसे पहले पुर्तगाल केवल तीन विश्व कप में ही शामिल हो पाया था). और उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े खेल मंच पर अपनी प्रतिभा से कई अविस्मरणीय क्षण दिए. 2018 में स्पेन के खिलाफ उनकी वह हैट्रिक याद है? आप 88वें मिनट में लगाई गई उस अकल्पनीय फ्री-किक को नहीं भूले होंगे जिसने स्कोर 3-3 से बराबर कर दिया था.
वह प्रतिभा थी. वह जादू था. वह रोनाल्डो थे.

