सरकार छात्रों के प्रति इतनी बेरहम कैसे हो सकती है? वे भारतीय हैं, पाकिस्तानी नहीं: सीजेपी संस्थापक के पिता

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के पिता ने शनिवार को अपने बेटे के दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने पर चिंता व्यक्त की और पूछा कि सरकार उन छात्रों के प्रति इतनी "बेरहम" कैसे हो सकती है जो भारतीय नागरिक हैं, न कि पाकिस्तानी.

यह दावा करते हुए कि देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, भगवान दीपके ने सवाल किया कि क्या सरकार किसी की मौत होने का इंतज़ार कर रही है?

उन्होंने सरकार पर छात्रों द्वारा उठाई गई मांगों को न सुनने का आरोप लगाया और अपने बेटे के अनिश्चितकालीन अनशन में शामिल होने की चेतावनी दी.

‘पीटीआई’ के अनुसार, प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए भगवान दीपके ने कहा, "एक पिता के रूप में, मैं अभिजीत को लेकर चिंतित हूँ. मैं प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर सिंहासन पर बैठे नरेंद्र मोदी को सद्बुद्धि दें, ताकि उन्हें समझ आए और सरकार आंदोलनकारी छात्रों की बात सुने. देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र भूख हड़ताल पर हैं." क्या सरकार किसी की मौत होने का इंतज़ार कर रही है? उनके लिए कितने लोगों को मरना चाहिए? उनके भीतर कोई दया नहीं है. अगर वह एक इंसान हैं, तो उन्हें छात्रों की बात सुननी चाहिए."

उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार छात्रों की बात नहीं सुनती है, तो "हम भी आंदोलन स्थल पर जाएंगे और दिल्ली में भूख हड़ताल शुरू करेंगे."

छात्रों की मांगों के प्रति सरकार की कथित उदासीनता पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारी पाकिस्तान से हैं? भगवान दीपके ने आगे कहा, "क्या ये (आंदोलनकारी) छात्र पाकिस्तान या किसी अन्य देश से हैं? वे भारतीय हैं. इस व्यक्ति को इतनी बेरहमी से व्यवहार नहीं करना चाहिए. मेरा कोई रिश्तेदार या मेरे समुदाय का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसने अभी नीट की परीक्षा दी हो." उनकी पत्नी ने कहा कि सरकार को वांगचुक के बारे में 20 जुलाई के बाद फैसला लेना चाहिए था, जब आंदोलन को एक महीना पूरा हो जाता.  उन्होंने आगे कहा, हमारी उससे (अभिजीत से) आखिरी बार तीन दिन पहले फोन पर बात हुई थी. उन्होंने कहा कि केवल सरकार ही जानती है कि इस आंदोलन को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है.

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