गौतम अडानी का केस वापस लेने के फैसले का विरोध नहीं करेंगे अमेरिकी मुख्य अभियोजक
ब्रुकलिन के मुख्य संघीय अभियोजक (यूएस अटॉर्नी) ने कहा है कि उनके पास भारतीय अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ मुकदमा बंद करने के अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) के फैसले का विरोध करने का कोई आधार नहीं है, लेकिन उन्होंने यह कहने से परहेज किया कि क्या वे धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के इस मामले को खारिज करने से सहमत हैं.
‘रॉयटर्स’ के लिए जोनाथन स्टेम्पल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि इस मामले की निगरानी कर रहे न्यायाधीश को शुक्रवार को भेजे एक पत्र में, अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला जूनियर ने कहा कि वे मामला वापस लेने के पीछे "फैसला लेने वाले व्यक्ति नहीं" थे, और उनके पास यह मानने का कोई आधार नहीं है कि उनके पर्यवेक्षक ट्रेंट मैकॉटर (जो न्याय विभाग के एक शीर्ष अधिकारी हैं) द्वारा बताए गए कारण मामला खारिज करने के "असली आधार" नहीं थे. अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गरौफिस ने नोसेला से यह स्पष्ट करने के लिए कहा था कि क्या वे अडानी मामले को वापस लेने के मैकॉटर के कारणों से सहमत हैं या असहमत, और क्या ऐसा करने के कोई अन्य आधार भी थे.
नोसेला के कार्यालय ने टिप्पणी के अनुरोधों पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. अडानी के वकीलों ने भी इसी तरह के अनुरोधों पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया.
मैकॉटर, जिनका पद 'प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल' है, ने 4 जुलाई के एक पत्र में अडानी के मामले को खारिज करने के कई कारणों का हवाला दिया था. इन कारणों में यह भी शामिल था कि यह मामला "विदेशी" था क्योंकि कई मुख्य आरोपी और कथित गड़बड़ी भारत में हुई थी, और अमेरिका को "दुनिया का पुलिसकर्मी" बनने का ढोंग नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के अधीन न्याय विभाग का नेतृत्व शायद अपने उत्तराधिकारियों के लिए एक ऐसा मामला छोड़ना चाहता था जो "दलदल" साबित हो सकता था.
नोसेला ने कहा कि वे इस मामले से जुड़ी कई बैठकों में शामिल हुए थे, लेकिन यह मैकॉटर ही थे जिन्होंने तय किया कि अभियोग को खारिज कर दिया जाना चाहिए.
अमेरिकी अधिकारियों ने अडानी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने पर सहमति जताई थी ताकि उनकी कंपनियों में से एक, अडानी ग्रीन एनर्जी, भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित कर सके.
इस बीच बुधवार को, अडानी ने एक हलफनामे में स्वीकार किया कि उन्होंने आपराधिक मामले और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) के एक संबंधित दीवानी मामले को सुलझाने के लिए इस साल की शुरुआत में अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर के निवेश की पेशकश की थी. उन्होंने कहा कि उनके वकील रॉबर्ट गियूफ्रा ने सुझाव दिया था कि यह निवेश एक समझौते का हिस्सा हो सकता है "यदि न्याय विभाग या एसईसी ऐसा चाहता हो."
अडानी ने नवंबर 2024 में अभियोग दर्ज होने से कुछ समय पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में 10 बिलियन डॉलर के संभावित निवेश की बात कही थी, और कहा था कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि कोई अभियोग आने वाला है. गियूफ्रा 'सुलिवन एंड क्रॉमवेल' के सह-अध्यक्ष हैं, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निजी वकील भी हैं.
बुधवार को सार्वजनिक किए गए 11 मई के एक ईमेल में, नोसेला ने कहा था कि उन्होंने किसी समझौते को किसी भी प्रकार के निवेश से जोड़ने को "स्पष्ट रूप से खारिज" कर दिया था, और एसईसी मामले को सुलझाना एक अलग मामला था. नोसेला ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने वह ईमेल भेजा था और 18 मई को आपराधिक मामले को खारिज करने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर "मैकॉटर के निर्देश या प्राधिकरण पर" किए थे.
इधर ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान, कई न्यायाधीशों ने बाइडन प्रशासन के दौरान शुरू हुए हाई-प्रोफाइल मामलों को समाप्त करने की सरकार की उत्सुकता पर सवाल उठाए हैं. अपने पत्र में, मैकॉटर ने कहा कि उन्होंने अडानी के आपराधिक मामले को खारिज करने का फैसला अडानी के निवेश की किसी भी चर्चा से पहले ही ले लिया था. अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी एसईसी मामले को सुलझाने के लिए 18 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हुए हैं. उनकी कंपनियों में से एक, अडानी एंटरप्राइजेस, ट्रेजरी विभाग की जांच को सुलझाने के लिए 275 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर राजी हुई है.

