चंपत राय के लेख में अयोध्या मंदिर निर्माण में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर सवाल, विवाद
‘द हिन्दू’ के मुताबिक, पूर्व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और वरिष्ठ विश्व हिंदू परिषद नेता चंपत राय ने 18 अगस्त को जारी अपने नौ पन्नों के हिंदी लेख में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं. लेख में चंपत राय ने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े लगभग सभी महत्वपूर्ण फैसलों पर नृपेंद्र मिश्रा का नियंत्रण था और वह खुद को सभी निर्णयों का मुख्य प्राधिकारी मानते थे.
विश्व हिंदू परिषद के मीडिया समूह में साझा किए गए लेख के अनुसार, नृपेंद्र मिश्रा की मंजूरी के बिना मंदिर निर्माण का कोई काम नहीं किया जाता था. चंपत राय ने लिखा कि यदि समिति के बाहर कोई निर्णय लिया भी जाता था, तो उसे स्वीकार नहीं किया जाता था और कई बार किए गए काम को हटा दिया जाता था.
उन्होंने बताया कि नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी पसंद के कई लोगों को मंदिर निर्माण समिति में शामिल किया था. इनमें पूर्व राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम अध्यक्ष अनूप मित्तल भी शामिल थे, जो नियमित रूप से समिति की बैठकों में हिस्सा लेते थे. राय के अनुसार, समिति की बैठक सामान्यतः हर महीने और कुछ समय के लिए हर 15 दिन में होती थी.
राम जन्मभूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 15 सदस्यों वाले श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था. इसके बाद नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करने वाली समिति का अध्यक्ष बनाया गया.
चंपत राय ने जहां नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण का "एकमात्र प्रभारी" बताया, वहीं उन्होंने परियोजना में उनकी भूमिका की प्रशंसा भी की. उन्होंने लिखा कि जब भी कोई बाधा सामने आई, नृपेंद्र मिश्रा ने संबंधित क्षेत्र के सक्षम लोगों को तुरंत अयोध्या बुलाया और समस्या का समाधान कराया.
लेख में मंदिर निर्माण से जुड़ी संस्थागत और तकनीकी व्यवस्था का भी उल्लेख है. चंपत राय के अनुसार, निर्माण एजेंसी के रूप में लार्सन एंड टुब्रो और परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का चयन नृपेंद्र मिश्रा ने किया था. उन्होंने यह भी लिखा कि नृपेंद्र मिश्रा को विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल की मंदिर निर्माण संबंधी दृष्टि की जानकारी थी.
मंदिर के वास्तुकार अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई सोमपुरा थे, जिन्हें अशोक सिंघल ने 1986 में चुना था और बाद में भी बनाए रखा गया. अन्य भवनों के निर्माण के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट्स को चुना गया, जिसका नेतृत्व जय काकड़िकार करते हैं.
चंपत राय के अनुसार, मंदिर का निर्माण जून 2020 में कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ और जून 2026 तक पूरा कर समाज को समर्पित कर दिया गया. उन्होंने इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय नृपेंद्र मिश्रा के प्रयासों को दिया. लेख में 70 एकड़ के मंदिर परिसर के विकास का भी विवरण है, जिसमें मंदिर के आसपास की संरचनाएं, अन्य मंदिर, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं, संग्रहालय, अतिथिगृह, सभागार, सुरक्षा दीवार और दूसरी आधारभूत सुविधाएं शामिल हैं.
यह लेख ऐसे समय सामने आया है जब चंपत राय को राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम से क्लीन चिट मिलने की खबरें सामने आई थीं. कथित चंदा चोरी के विवाद के बीच उन्होंने जुलाई में ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था.
"मामला जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा है"
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार प्रभारी पवन खेड़ा ने चंपत राय के लेख को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चंदा चोरी के आरोप सामने आने के समय नृपेंद्र मिश्रा की टिप्पणियों का हवाला दिया. खेड़ा के अनुसार, उस समय नृपेंद्र मिश्रा ने आरोपों को ट्रस्ट पर "दाग" बताया था.
नृपेंद्र मिश्रा ने द हिंदू को दिए एक साक्षात्कार में ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव भी दिया था. बाद में इस दिशा में प्रक्रिया शुरू की गई. उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रस्ट को खर्च किए गए प्रत्येक रुपये का विवरण सार्वजनिक करना चाहिए, क्योंकि धन भगवान राम के भक्तों का है.
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि अब चंपत राय ने मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया के लिए नृपेंद्र मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने इसे दो व्यक्तियों के बीच केवल बयानबाजी मानने के बजाय व्यापक राजनीतिक संघर्ष बताया. खेड़ा ने दावा किया कि नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माने जाते हैं, जबकि चंपत राय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं. उन्होंने इसे नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बताया.
हालांकि, नृपेंद्र मिश्रा ने द हिंदू से बातचीत में कहा कि उन्होंने चंपत राय का लेख विस्तार से पढ़ा है और उसमें उन्हें कुछ भी नकारात्मक या विवादास्पद नहीं लगा.

