मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के लिए भाजपा और चुनाव आयोग द्वारा “घुसपैठियों” का हवाला दिया जाता है. गृह मंत्री अमित शाह ने तो कहा था- “घुसपैठियों पर हमारी पार्टी की नीति है: पहचान करो, नाम हटाओ और देश से बाहर निकालो (डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट); जबकि विपक्ष की नीति घुसपैठ को सामान्य बनाना, उसे मान्यता देना और मतदाता सूची में जोड़कर उसे औपचारिक रूप देना है.” लेकिन इस मामले में ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में हिमांशी दहिया की रिपोर्ट हकीकत बयां करती है. इसके मुताबिक, छह राज्यों में, जहां कुल मतदाताओं की संख्या करीब 9.86 करोड़ है, केवल 1,600 लोगों के नाम ही विदेशी नागरिकों के रूप में चिह्नित किए गए हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, जब भारत निर्वाचन आयोग ने पिछले साल बिहार में एसआईआर की घोषणा की थी, तो उसने इस कवायद के उद्देश्यों में से एक "विदेशी अवैध प्रवासियों के नामों के शामिल होने" का उल्लेख किया था. पर ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ की पड़ताल में पाया गया है कि कम से कम छह राज्यों में जहाँ एसआईआर पूरा हो चुका है या जारी है, अब तक पहचाने गए संदिग्ध विदेशी नागरिकों की संख्या (लगभग कम से कम 1,600) मतदाताओं की कुल संख्या और सूचियों से हटाए गए नामों के बड़े पैमाने की तुलना में बेहद मामूली है.
कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि जहाँ एसआईआर प्रक्रिया के तहत अंतिम मतदाता सूची में से 99.7 लाख (9.97 मिलियन) नाम हटाए गए हैं, वहीं अधिकारियों ने हटाए जाने योग्य 716 विदेशी नागरिकों की पहचान की, जिनमें बेंगलुरु उत्तर से नेपाल के 545 नागरिक शामिल हैं.
दक्षिण कन्नड़ में निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि 40 विदेशी नागरिकों की पहचान की गई, जिनमें नेपाल के 17, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका से 6-6, कनाडा से 5, ब्रिटेन से 2, और नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड तथा नॉर्वे से 1-1 नागरिक शामिल हैं.
जिला अधिकारियों के अनुसार, उत्तर कन्नड़ में 22 मामले सामने आए, जिनमें नेपाल, पाकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका और बांग्लादेश के नागरिक शामिल हैं. जिला निर्वाचन अधिकारी टी. के. स्वरूपा ने संवाददाताओं को बताया कि उडुपी में नेपाल, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा सहित विभिन्न देशों के 47 विदेशी नागरिक पाए गए.
एक अधिकारी ने बताया, “जिन कुछ लोगों के पास मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी कार्ड) थे, वे सत्यापन के दौरान अपने स्कूल प्रमाण पत्र और संपत्ति के रिकॉर्ड सहित अन्य दस्तावेजों का विवरण प्रदान नहीं कर सके.”
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने उन 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ से बात की जहाँ एसआईआर पूरा हो चुका है या ड्राफ्ट रोल (प्रारूप मतदाता सूची) प्रकाशित हो चुका है. 11 राज्यों के अधिकारियों ने जवाब दिया. छह राज्यों ने संदिग्ध विदेशियों का आंकड़ा दिया, जबकि चार ने कहा कि वे यह डेटा नहीं रखते हैं. ओडिशा ने कहा कि उसे ऐसे मामले मिले लेकिन उसने कोई आंकड़ा दर्ज नहीं किया. ओडिशा राज्य के एक अधिकारी ने कहा, “हमें मतदाता सूची में संदिग्ध विदेशी नागरिक जरूर मिले, लेकिन हमने कोई आंकड़ा नहीं रखा.”
चुनाव आयोग ने कहा कि उसने कभी भी राज्यों से यह डेटा नहीं मांगा. आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “राज्यों को अलग से यह डेटा एकत्र करने के लिए नहीं कहा गया था. हमारे पास भी इस बारे में कोई समेकित या राज्यवार डेटा नहीं है.
झारखंड में, जहाँ 5 अगस्त को ड्राफ्ट रोल प्रकाशित हुआ था और अंतिम सूची 30 नवंबर को आनी तय है, अधिकारियों ने तीन विदेशी नागरिकों की पहचान की—जो सभी अफगानिस्तान के रहने वाले हैं.
ड्राफ्ट रोल में 2.21 करोड़ नाम शामिल थे, जिसमें एसआईआर से पहले की 2.646 करोड़ लोगों की सूची से लगभग 43.6 लाख नाम कम हो गए.
मेघालय में नेपाली मूल के दो पुरुष, जिन्होंने भारतीय महिलाओं से शादी की है, मतदाता सूची में पाए गए. 26 अक्टूबर को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 21.8 लाख नाम शामिल थे, जिसमें कुल 1,65,682 नाम कम हुए.
केरल में लगभग 500 ऐसे लोग मिले जिनके पास विदेशी नागरिकता थी, लेकिन फिर भी वे मतदाता सूची में शामिल थे. 21 फरवरी को प्रकाशित राज्य की अंतिम सूची में 2.695 करोड़ नाम शामिल थे, जिसमें कुल 8,97,211 नाम हटाए गए.
गोवा में 419 संदिग्ध विदेशी पासपोर्ट धारकों की पहचान की गई. 21 फरवरी को प्रकाशित राज्य की अंतिम मतदाता सूची में 10.6 लाख नाम थे, जिसमें कुल 1,27,468 नाम कम हुए.
मिजोरम में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया. 7 सितंबर को प्रकाशित राज्य की अंतिम मतदाता सूची में 8.35 लाख नाम शामिल थे, जिसमें कुल 39,000 नाम हटाए गए. पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड और तेलंगाना के सीईओ कार्यालयों के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने यह डेटा नहीं रखा.
याद करें, 24 जून 2025 को चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर की शुरुआत की घोषणा की थी. उसने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था, “तेजी से शहरीकरण, लगातार प्रवास, युवा नागरिकों का मतदान के लिए पात्र होना, मौतों की सूचना न मिलना और विदेशी अवैध प्रवासियों के नामों के शामिल होने जैसे विभिन्न कारणों से गहन पुनरीक्षण करना आवश्यक हो गया है, ताकि मतदाता सूचियों की अखंडता और त्रुटिहीन तैयारी सुनिश्चित की जा सके.”

