‘एक बार नामांकन खारिज होने पर, उपाय केवल ईसी के पास है’: मीनाक्षी नटराजन मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि यदि चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) द्वारा किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज कर दिया जाता है, तो एकमात्र उपाय चुनाव आयोग (ईसी) का रुख करना है. अदालत कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी थी.

‘पीटीआई’ के अनुसार, अदालत ने नटराजन से ऐसा कोई भी पुराना फैसला दिखाने को कहा, जिसमें कोर्ट ने ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया हो. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने कहा, "फैसला चाहे कितना भी त्रुटिपूर्ण (गलत) क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज होने के बाद, इसका उपाय आमतौर पर कहीं और होता है. क्या इस अदालत का ऐसा कोई फैसला है जहाँ हमने इस स्तर पर हस्तक्षेप किया हो?"

नटराजन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल उसी आपराधिक मामले का खुलासा करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो साल की सजा का प्रावधान हो, जबकि वर्तमान मामले में केवल समन जारी किए गए थे.

उन्होंने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपी एक्ट) के तहत एक कथित आपराधिक मामले का खुलासा न करने का हवाला देते हुए चुनाव अधिकारी द्वारा मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र गलत तरीके से खारिज कर दिया गया.

कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा चुनाव नामांकन खारिज करके "सीट चोरी" के इस ताजा मामले में "अपराध के भागीदार" हैं. कांग्रेस ने दावा किया कि नामांकन खारिज करना "त्रुटिपूर्ण और तर्कहीन" था.

उधर नई दिल्ली में मध्यप्रदेश कांग्रेस के 61 विधायकों की एक बैठक में कहा गया कि देश चुनावी तानाशाही की ओर बढ़ रहा है. कांग्रेस ने भाजपा पर राजनीतिक लाभ के लिए चुनावी संस्था (चुनाव आयोग) के साथ मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट करने का आरोप लगाया है और कहा है कि यह लड़ाई 'संवैधानिक मॉडल' और 'मोदी मॉडल' के बीच है. 

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