ट्रंप ने होर्मुज के पास भारतीय जहाजों पर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया: कहा- ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान पर वाशिंगटन और तेहरान के बीच बन रहे एक समझौते की शर्तों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने जिन विवरणों को लीक किया है, उनका "सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है".  इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भारत से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों पर एक विफल ड्रोन हमले की निंदा की.

अनिरुद्ध धर के अनुसार, यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत इस संघर्ष के परिणामों से जूझ रहा है. भारत ने एक अमेरिकी हमले में अपने तीन नाविकों को खो दिया है, जबकि भारतीय चालक दल वाले एक अन्य जहाज पर हुए हमले में बड़ी मुश्किल से अन्य नाविकों की जान बची.

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "ईरान ने 'फेक न्यूज' को जो शर्तें लीक की हैं, उनका उन शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है जिन पर लिखित रूप में सहमति बनी थी."

उन्होंने आगे कहा, "डील होने को लेकर दिए गए उनके कमजोर और दयनीय बयान सहित उन्होंने जो कुछ भी कहा है, उसका सच्चाई से कोई संबंध नहीं है. ये लेन-देन के मामले में बहुत ही बेईमान लोग हैं. इनके साथ नेक नियती से काम करने जैसा कुछ नहीं होता. कमाल है!"

ट्रंप ने खाड़ी में भारतीय जहाजों पर होने वाले हमलों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा, "बीती रात होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों के खिलाफ उनके पूरी तरह से विफल रहे ड्रोन हमले 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' हैं. बेहतर होगा कि वे अपनी हरकतें सुधार लें, और वो भी तेजी से!"

ट्रंप की टिप्पणी भारतीय जीवन और वाणिज्यिक हितों को अमेरिका-ईरान के बढ़ते विवाद के केंद्र में लाती है. फिलीपींस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक आपूर्तिकर्ता देश भारत, ओमान के पास एक वाणिज्यिक टैंकर पर हुए अमेरिकी हमले में पहले ही अपने तीन नाविक खो चुका है, जबकि इसके एक दिन बाद 20 भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले एक अन्य जहाज पर हमला हुआ.

दुनिया की लगभग एक-तिहाई तेल आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है और लाखों भारतीय खाड़ी क्षेत्र में रहते और काम करते हैं. ऐसे में इस क्षेत्र में जारी अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और उसके नागरिकों की सुरक्षा, दोनों के लिए खतरा पैदा करती है.

समझौते की शर्तों पर विवाद

ट्रंप की नवीनतम टिप्पणी उनके एक दिन पहले के आशावादी रुख से बिल्कुल उलट थी, जब उन्होंने कहा था कि उन्होंने ईरान पर नियोजित हमलों को टाल दिया है क्योंकि व्यावहारिक रूप से एक समझौता हो चुका था.

हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से जिन शर्तों को रेखांकित किया है, वे वाशिंगटन के घोषित उद्देश्यों से काफी अलग दिखती हैं.

एक वरिष्ठ ईरानी स्रोत ने रॉयटर्स को बताया कि समझौते के मसौदे में ईरानी तेल निर्यात पर से प्रतिबंध हटाना, ईरानी संपत्तियों में जमे (फ्रीज) अरबों डॉलर को जारी करना और लेबनान सहित कई मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करना शामिल होगा. सूत्र ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों को भविष्य की वार्ताओं के लिए टाल दिया जाएगा.

वाशिंगटन का हमेशा से यह रुख रहा है कि किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे, जबकि तेहरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है.

क्रॉसफायर में फंसे भारतीय जहाज

ट्रंप द्वारा भारतीय जहाजों का उल्लेख ऐसे समय में किया गया है जब इस संघर्ष में भारतीय नाविकों को हुए नुकसान को लेकर भारत में गुस्सा बढ़ रहा है.

24 भारतीय नाविकों को ले जा रहे पलाऊ के ध्वज वाले तेल टैंकर 'मैरिवेक्स' को 8 जून को अमेरिकी बलों ने निष्क्रिय (डिसेबल) कर दिया था. चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया. 10 जून को, अमेरिका ने पलाऊ के ध्वज वाले एक अन्य टैंकर 'सेटेबेलो' पर हमला किया, जिसमें सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई. गुरुवार को एक और जहाज 'जलवीर' पर हमला हुआ, जो गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाला टैंकर है और जिसमें 20 भारतीय सवार थे.

इन मौतों के कारण नई दिल्ली को नागरिक जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग का विरोध करने के लिए तीन दिनों में दूसरी बार अमेरिकी कार्यवाहक (चार्ज डी'अफेयर्स) जेसन मीक्स को तलब करना पड़ा.

भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने "नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक और जानलेवा बल के उपयोग पर अपनी गहरी चिंता" व्यक्त की है, और ऐसी कार्रवाइयों को अस्वीकार्य तथा समुद्री स्थिरता के लिए हानिकारक बताया है.

इन घटनाओं के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह मांग भी की जाने लगी है कि वे अगले सप्ताह होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप से संभावित मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को सीधे उनके सामने उठाएं.

गतिरोध के बिंदु

ट्रंप के इस आग्रह के बावजूद कि ईरान को "अपनी हरकतें सुधारनी चाहिए", बड़े गतिरोध वाले मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं.

ईरान लगातार प्रतिबंधों से राहत, फ्रीज की गई संपत्तियों तक पहुंच और व्यापक क्षेत्रीय रियायतों की मांग कर रहा है, जबकि अमेरिका तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर मजबूत आश्वासन के लिए दबाव बना रहा है.

प्रस्तावित समझौते की शर्तों पर स्पष्ट असहमति कूटनीतिक प्रक्रिया की नाजुकता को रेखांकित करती है, भले ही दोनों पक्ष बड़े युद्ध से बचने की इच्छा का संकेत दे रहे हों.

भारत के लिए, इसके दांव भू-राजनीति से कहीं आगे हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी लंबे व्यवधान से तेल की कीमतें बढ़ने, व्यापार मार्ग प्रभावित होने और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री गलियारों में से एक में काम करने वाले हजारों भारतीय नाविकों के लिए खतरा और बढ़ने का जोखिम है.

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