ई.ए.एस. शर्मा | मुख्य चुनाव आयुक्त के एसआईआर और फॉर्म 6 संबंधी एकतरफा फैसले प्रथम दृष्टया अवैध

‘काउंटरकरंट्स’ में भारत सरकार के पूर्व सचिव ई.ए.एस. शर्मा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि 19 फरवरी 2025 के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने निर्वाचन आयोग के बहुसदस्यीय निकाय के बजाय व्यक्तिगत हैसियत से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए. शर्मा ने इन फैसलों को प्रथम दृष्टया अवैध बताते हुए विभिन्न राज्यों में जारी एसआईआर रोकने और फॉर्म 6 को सरकार द्वारा स्वीकृत मूल प्रारूप में बहाल करने की मांग की है.

शर्मा ने 26 सितंबर 2026 को जारी निर्वाचन आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के उस बिंदु का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले साझा किया जाएगा और बैठक के बाद कार्यवृत्त जारी किया जाएगा. उनके मुताबिक, इससे यह सवाल उठता है कि क्या वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यभार संभालने के बाद आयोग ने पहली बार अब बहुसदस्यीय निकाय के रूप में बैठक करने का निर्णय लिया है.

उन्होंने कहा कि यदि 19 फरवरी 2025 से 26 सितंबर 2026 के बीच आयोग की औपचारिक बैठकें नहीं हुईं, तो एसआईआर, फॉर्म 6 में संशोधन और ‘लॉजिकल मैपिंग’ जैसे महत्वपूर्ण फैसले केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ने व्यक्तिगत रूप से लिए होंगे. शर्मा ने आयोग से इस अवधि में हुई बैठकों की तारीखें, एजेंडा, कार्यवृत्त और असहमति संबंधी टिप्पणियां अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की है.

पत्र में फॉर्म 6 के दो अलग-अलग प्रारूपों पर भी आपत्ति जताई गई है. आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एसआईआर अवधि में फॉर्म 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र इस्तेमाल होगा, जबकि एसआईआर के बाहर मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रारूप लागू रहेगा.

शर्मा का तर्क है कि एक ही आवेदन के लिए एसआईआर और गैर-एसआईआर अवधि में अलग-अलग प्रारूप रखना असंगत है. उन्होंने कहा कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत सरकार द्वारा अधिसूचित फॉर्म 6 में महत्वपूर्ण बदलाव करने का अधिकार सरकार के पास है. उनके अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा सरकार की मंजूरी और आयोग की औपचारिक सहमति के बिना किया गया संशोधन प्रथम दृष्टया अवैध है.

शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या संशोधित फॉर्म 6 और उससे जुड़े घोषणा-पत्र को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखते समय आयोग ने बदलाव की प्रक्रिया और उसकी मंजूरी से जुड़ी पूरी जानकारी अदालत को दी थी. उन्होंने आयोग से इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय को तथ्यात्मक स्थिति बताने का आग्रह किया है.

पत्र के अंत में शर्मा ने आयोग से तीनों सदस्यों की औपचारिक बैठक बुलाकर इन मुद्दों पर विचार करने और निर्णय सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोग ऐसा नहीं करता, तो वे न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे.

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