भारत का आरोप: पर्नोड ने कम टैरिफ देने के लिए स्कॉच की संरचना और उम्र की जानकारी छिपाई
भारतीय जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि पर्नोड रिकॉर्ड ने अपने आयातित स्कॉच व्हिस्की की वास्तविक कीमत छिपाने और कम टैरिफ का भुगतान करने के लिए उसकी उम्र और संरचना (कंपोजीशन) की जानकारी छिपाई थी. इसके बाद फ्रांसीसी कंपनी से $314 मिलियन (लगभग ₹2,600 करोड़ से अधिक) का बकाया टैक्स चुकाने को कहा गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच एक कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है.
चिवास (शिवास) रीगल व्हिस्की और एब्सोल्यूट वोदका बनाने वाली कंपनी पर्नोड के लिए मात्रा (वॉल्यूम) के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है. कंपनी अब सितंबर के इस फैसले को रद्द कराने की कोशिश कर रही है. पर्नोड का तर्क है कि जांच के दौरान उसे मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा (प्राइसिंग डेटा) को देखने की अनुमति नहीं दी गई थी.
टैक्स की शुरुआती मांग की चेतावनी भले ही ‘रॉयटर्स’ द्वारा 2022 में रिपोर्ट की गई थी, लेकिन हाल के महीनों में दिल्ली उच्च न्यायालय में जमा किए गए दस्तावेजों और जांच रिपोर्टों सहित सैकड़ों नए कागजात इस बड़े दांव वाली कानूनी लड़ाई के कई अनकहे विवरणों का खुलासा करते हैं.
दस्तावेजों से पता चलता है कि सितंबर में भारतीय जांच टीम ने निष्कर्ष निकाला कि पर्नोड ने नए आंतरिक माल्ट कोड नामों का उपयोग करके अपने खुलासों को "जानबूझकर जटिल" बनाया, ताकि सीमा शुल्क (कस्टम) अधिकारियों के लिए इसके आयात की तुलना प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के आयात से करना अधिक कठिन हो जाए.
24 जनवरी को एक सरकारी फाइलिंग में शामिल जांचकर्ताओं की रिपोर्ट में कहा गया कि पर्नोड ने "आयातित माल के वास्तविक मूल्य को छिपाने और तुलना से बचने के इरादे से अपने आयातित माल्ट का सही विवरण (यानी इसकी सटीक संरचना और उम्र) घोषित नहीं किया था."

