राहुल देव | राम मंदिर कभी भी अपनी संदिग्धता से बाहर नहीं जा पाएगा
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर गठित एसआईटी की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल खड़ा हो गया है. ‘हरकारा डीप डाइव’ में वरिष्ठ पत्रकार और संपादक राहुल देव के साथ निधीश त्यागी ने इसी मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की.
राहुल देव के मुताबिक, राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा और आरएसएस के लिए एक बड़ा राजनीतिक प्रोजेक्ट भी रहा है. ऐसे में मंदिर के संचालन में लंबे समय तक चोरी होने का आरोप सामने आना गंभीर सवाल पैदा करता है. उनका कहना है कि एसआईटी की जांच में अगर जिम्मेदारी तय नहीं होती तो यह सवाल बना रहेगा कि आखिर बड़ी मछलियां कौन थीं और वे कैसे बच गईं.
राहुल देव सवाल उठाते हैं कि जब मंदिर की व्यवस्था में केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े लोगों की भूमिका है, तो जांच भी उन्हीं सरकारी तंत्रों के बीच सीमित रहने से निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उनके अनुसार, एक वास्तविक और पारदर्शी जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए था कि मंदिर की चेन ऑफ कमांड और चेन ऑफ रिपोर्टिंग क्या थी, किस स्तर तक जानकारी पहुंचती थी और चोरी इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही.
बातचीत में सीसीटीवी फुटेज का मुद्दा भी सामने आता है. मंदिर जैसे हाई-प्रोफाइल परिसर में फुटेज लंबे समय तक सुरक्षित क्यों नहीं रखी गई? जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से मंदिर में अनियमितताओं की बात कही, उनसे पूछताछ क्यों नहीं हुई? और अगर कुछ लोग दोषी पाए गए तो उनके ऊपर निगरानी रखने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या थी?
राहुल देव का आरोप है कि इस मामले में छोटे स्तर के लोगों पर कार्रवाई हुई, लेकिन बड़ी जिम्मेदारियों तक जांच नहीं पहुंची. उनका कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट किसी को पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं कर सकती, खासकर तब जब रिपोर्ट की पूरी जानकारी सार्वजनिक ही न हो.
बातचीत आगे राम मंदिर और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक पहुंचती है. राहुल देव मानते हैं कि राम मंदिर से जुड़ी चोरी का मामला चुनाव में मुद्दा जरूर बनेगा, हालांकि इसका वोट पर कितना असर होगा, यह कहना अभी मुश्किल है. उनके मुताबिक, यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है क्योंकि चोट लोगों की धार्मिक आस्था पर हुई है.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राम मंदिर की व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी या एसआईटी रिपोर्ट के बाद भी संदेह बना रहेगा.
पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं.

