उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी (सपा) तीन सीटों पर विजयी रही है. संजय पांडे के अनुसार, सपा उम्मीदवार दो सीटों पर आगे चल रहे थे जहाँ मतगणना जारी थी और देर शाम तक नतीजे आने की उम्मीद थी. भाजपा ने लखनऊ, मेरठ-सहारनपुर, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद की शिक्षक सीटें जीतीं, वहीं सपा ने वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर जीत हासिल की.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह नगर गोरखपुर में, भाजपा उम्मीदवार ध्रुव त्रिपाठी अपने निकटतम निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी राजीव यादव से 307 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज करने में सफल रहे. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा को झटका लगा, जहाँ सपा उम्मीदवार लाल बहादुर यादव ने भाजपा के प्रमोद मिश्रा को पांच हजार से अधिक वोटों से हराया. वाराणसी स्नातक सीट पर सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा आगे चल रहे थे.
भाजपा ने आगरा और मेरठ-सहारनपुर की स्नातक सीटों पर भी जीत हासिल की, जबकि इलाहाबाद-झांसी सीट पर सपा विजयी रही. लखनऊ स्नातक सीट से भी सपा आगे चल रही थी. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने वाराणसी में अपनी पार्टी की जीत का स्वागत किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "यह नतीजा भाजपा की नाकामियों का रोडशो है."
यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नतीजे पार्टी की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे. उन्होंने वाराणसी के नतीजे की ओर इशारा करते हुए कहा, "सपा वहाँ जीत गई जहाँ उसे नहीं जीतना चाहिए था."
इधर, अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में पार्टी की हार के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पर तंज़ करने से नहीं चूके. मोदी ने 'एक्स' पर लिखा, “4 बड़े राज्यों—उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की 28 सीटों पर एमएलसी चुनाव हुए. चुनाव बैलेट पेपर से हुए. अंदाज़ा लगाइए कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं?”
इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने मोदी को चुनौती दी कि यदि उनका मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) परिणामों को प्रभावित नहीं करती हैं, तो वे आगामी सभी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बैलेट पेपर का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हों. पार्टी ने कहा कि उन्हें केवल "बयानबाज़ी के बजाय अपने काम" से भाजपा की चुनावी ताकत पर अपने विश्वास को साबित करना चाहिए.
बता दें कि इसके पहले बिहार विधानसभा उपचुनाव में बांकीपुर सीट भी भाजपा हार गई थी, जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. एमएलसी उप चुनाव में अब पीएम मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भी पार्टी को हार देखना पड़ी है.

