‘डाउन टू अर्थ’ में नंदिता बनर्जी की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में दुनिया भर में सशस्त्र संघर्षों के दौरान मारे गए नागरिकों में हर चार में से एक महिला या लड़की थी. यह अनुपात 2021 की तुलना में दोगुना है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल संघर्षों में 37,000 से अधिक नागरिक मारे गए और हर दिन कम से कम 25 महिलाओं तथा लड़कियों की जान गई.
26 अक्टूबर को जारी संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ‘महिला, शांति और सुरक्षा’ संबंधी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 75 करोड़ महिलाएँ और लड़कियाँ सक्रिय संघर्ष वाले क्षेत्रों के 50 किलोमीटर के दायरे में रह रही हैं. यह संख्या 2024 की तुलना में चार करोड़ अधिक है और 1990 के बाद सबसे ज्यादा है. संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था की कार्यकारी निदेशक सीमा बहौस ने कहा कि कई दशकों में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में महिलाएँ और लड़कियाँ युद्धों के बीच फँसी हुई हैं. उन्होंने चिंता जताई कि सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि विकास सहायता में कमी आ रही है.
हिंसा और गरीबी का बढ़ता संकट
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच संयुक्त राष्ट्र द्वारा सत्यापित संघर्ष-संबंधी यौन हिंसा के मामलों की संख्या लगभग चार गुना हो गई. संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली लगभग 17 करोड़ महिलाएँ और लड़कियाँ अत्यधिक गरीबी का सामना कर रही हैं. वे प्रतिदिन तीन डॉलर से भी कम पर गुजारा करती हैं. ये महिलाएँ और लड़कियाँ दुनिया भर में अत्यधिक गरीबी में रहने वाली महिलाओं तथा लड़कियों की कुल संख्या का लगभग 40 प्रतिशत हैं.
संघर्ष प्रभावित देशों में महिलाएँ और लड़कियाँ पुरुषों तथा लड़कों की तुलना में बिना वेतन वाले घरेलू काम और दूसरों की देखभाल करने में पाँच गुना अधिक समय बिताती हैं. यह अंतर वैश्विक औसत से दोगुना है. रिपोर्ट में ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई गई है. आबादी वाले इलाकों में इन तकनीकों के इस्तेमाल से नागरिकों के हिंसा और विस्थापन की चपेट में आने का खतरा बढ़ सकता है.
शांति वार्ताओं में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम
संघर्ष के दौरान समुदायों की रक्षा करने और हिंसा से प्रभावित लोगों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद महिलाओं को औपचारिक शांति वार्ताओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर की 57 शांति प्रक्रियाओं में वार्ताकारों के रूप में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल पाँच प्रतिशत थी. 2024 में यह आँकड़ा सात प्रतिशत था.
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में दुनिया का सैन्य खर्च बढ़कर रिकॉर्ड 2.9 लाख करोड़ डॉलर तक पहुँच गया. दूसरी ओर, वित्तीय सहायता की कमी के कारण संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले 40 प्रतिशत महिला संगठनों को आशंका है कि अगले एक वर्ष के भीतर उन्हें अस्थायी या स्थायी रूप से अपना काम बंद करना पड़ सकता है.
ये संगठन हिंसा से प्रभावित महिलाओं को आश्रय देने, पीड़ितों की सहायता करने और स्थानीय विवादों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. संयुक्त राष्ट्र महिला संस्था ने महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, अंतरराष्ट्रीय कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने और महिलाओं के नेतृत्व में चलने वाले शांति प्रयासों के लिए लगातार वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है.
रिपोर्ट में सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से शांति तथा सुरक्षा से जुड़े फैसलों में महिलाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है.

