राम मंदिर चढ़ावा घोटाले पर मचे बवाल से घबराई भाजपा, चुनावी राज्य यूपी में सांप्रदायिक बयानों की ओर मुड़ी

‘द वायर’ के लिए उमर राशिद की रिपोर्ट का सारांश कहता है कि राम मंदिर में चंदे के पैसे की शर्मनाक हेराफेरी के कारण बैकफुट पर आई सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी राज्य उत्तर प्रदेश के लिए अपनी पसंदीदा पुरानी रणनीति फिर से निकाल ली है: सांप्रदायिक बयानों को तेज करना और अपने प्रतिद्वंद्वियों को मुस्लिम-परस्त दिखाना.

अयोध्या मंदिर में चंदे के धन का दुरुपयोग घोर वित्तीय भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है. इन सबसे ऊपर, यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे जुड़े संगठनों की राजनीतिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है, जिन्होंने व्यावहारिक रूप से मंदिर और उसके निर्माण के आंदोलन का प्रबंधन उस स्थान पर किया था जहाँ 6 दिसंबर, 1992 तक मुगल काल की बाबरी मस्जिद खड़ी थी.

हालांकि, मंदिर में चंदे की चोरी को लेकर जनता के बीच बने हुए सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय, सत्तारूढ़ दल ने अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एक तीखा जवाबी हमला शुरू कर दिया है.  महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभियान पारदर्शिता और जवाबदेही के सवालों से बचता है. इसके बजाय, यह भ्रष्टाचार की गंभीरता को कम करके आंकता है और सवाल उठाने वाले आलोचकों को "रामद्रोही" और 'मुस्लिम-परस्त' बताकर बदनाम करता है.

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति दे दी है. पिछले दिनों भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी की कमान संभालने के बाद लखनऊ का अपना पहला दौरा किया. 'शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन' में नबीन ने अयोध्या विवाद से निपटने का एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया.  उन्होंने भाजपा, आरएसएस और विहिप को हिंदू धर्म का सच्चा रक्षक घोषित किया, जबकि विपक्षी नेताओं—अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव और राहुल गांधी—को 'हिंदू विरोधी ताकतें' करार दिया. उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए इस संवेदनशील मुद्दे का फायदा उठाने का आरोप लगाया.

नितिन नबीन के संकेतों पर चलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विपक्षी दलों पर अपने हमले तेज कर दिए हैं. सुल्तानपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, बांदा और अयोध्या के विभिन्न कार्यक्रमों में उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) को घेरने के लिए सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील मुद्दों को उठाया. आदित्यनाथ ने विपक्ष को 'छद्म धर्मनिरपेक्ष' कहते हुए तर्क दिया कि जो लोग 'राम भक्त' नहीं हैं, उन्हें चंदे की चोरी पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है. भाजपा ने आलोचना करने वालों को 'रामद्रोही' के रूप में प्रचारित किया है ताकि भ्रष्टाचार के मूल मुद्दे से जनता का ध्यान भटकाया जा सके.

यद्यपि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, लेकिन भाजपा संस्थागत जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवालों पर खामोश है. समाचारों में कई महत्वपूर्ण अनुत्तरित प्रश्न उठाए गए हैं: मसलन, राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? निष्पक्षता और विश्वसनीयता के लिए इस मामले की जांच सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसी को क्यों नहीं सौंपी गई? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने भव्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह की अगुवाई की थी, इस विषय पर मौन क्यों हैं? ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने में क्यों विफल रहे?

लेकिन, वित्तीय घोटाले से ध्यान हटाने और खुद को हिंदू हितों का एकमात्र रक्षक साबित करने के लिए भाजपा नेतृत्व ने कई पुराने और नए विवादों को हवा दी है:

कब्रिस्तानों की चारदीवारी: आरोप लगाया गया कि पिछली सपा सरकार ने हिंदू धार्मिक स्थलों का पैसा मुस्लिम कब्रिस्तानों के विकास में लगाया.

कारसेवकों पर गोलीबारी: 1990 की घटना का जिक्र कर सपा को हिंदू विरोधी ठहराने का प्रयास किया गया.

राम सेतु विवाद: यूपीए सरकार के समय एएसआई द्वारा दिए गए हलफनामे के आधार पर कांग्रेस को राम विरोधी बताया गया.

अन्य धार्मिक मुद्दे: गोवंश वध, कांवड़ यात्रा पर कथित प्रतिबंध, त्योहारों पर दंगे, और वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा गया.  इसके अतिरिक्त, सपा को बाबर और औरंगजेब का अनुयायी बताया गया.

2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को उत्तर प्रदेश में भारी राजनीतिक झटका लगा था, जहां पार्टी ने अयोध्या (फैजाबाद निर्वाचन क्षेत्र) सहित अपनी कई सीटें खो दीं और उसकी संख्या घटकर 36 रह गई. इस चुनावी विफलता और वर्तमान चंदा घोटाले के बाद, 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अयोध्या एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है.  हालांकि, इस बार भाजपा विकास और सुशासन के बजाय अपनी पारंपरिक ध्रुवीकरण की राजनीति के सहारे चुनावी नैया पार लगाने के प्रयास में दिख रही है.

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